केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी का बड़ा बयान, कहा-'अगर राजनीति ना हो तो 29 दिसंबर को हर मुद्दे का हल निकल जाएगा'
I firmly believe talks scheduled on Dec 29 will resolve issues said Kailash Chaudhary: कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन एक महीने से जारी है, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं तो वहीं सरकार की कोशिश इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाने की है, वो कानून को रद्द नहीं करना चाहती है। तो इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि समस्याएं केवल बातचीत से सुलझ सकती हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि 29 दिसंबर को प्रस्तावित बातचीत में मुद्दे का हल होगा अगर किसानों को नजरिये से चीजों को देखा जाएगा, राजनेताओं के नजरिये से नहीं, तो इसका सकारात्मक परिणाम ही सामने आएगा।

इस बीच स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) ने फिर से सरकार के साथ बैठक की बात कही है।योगेंद्र यादव ने शनिवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था कि हम 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे केंद्र के साथ वार्ता का एक और दौर आयोजित करने का प्रस्ताव रखते हैं। इस बार वार्ता के लिए हमारे एजेंडे में दो बिंदु हैं। जिसमें पहला तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीके पर आधारित है, जबकि दूसरा एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानूनी गारंटी प्रदान करने के लिए नया कानून लाने पर। वहीं क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शनपाल ने बताया कि वो 30 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर से ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।
कृषि मंत्री तोमर ने किसानों को आठ पन्नों का खुला पत्र लिखा था
मालूम हो कि इससे पहले कृषि मंत्री तोमर ने किसानों को आठ पन्नों का खुला पत्र लिखा था, जिसके बाद पीएम मोदी ने भी किसानों से अपील की थी वो इस खत को जरूर पढ़े, कृषि कानून आपके खिलाफ नहीं है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शनकारी किसानों की तरफ से अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने कहा था कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनके द्वारा कही गई हर बात तथ्यहीन है, यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों के मुद्दों को हल करने की कोशिश में, पिछले दो दिनों में आपने किसानों की मांगों और उनके विरोध पर जो हमला किया है, वह बताता है कि किसानों के साथ आपकी कोई सहानुभूति नहीं है।
सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है
बताते चलें कि अब तक सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसका नतीजा कोई नहीं निकला है। मालूम हो कि केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से ही आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों को कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। नए कानूनों के खिलाफ ये आंदोलन अभी तक मुख्य रूप से पंजाब में हो रहा था। 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की और कूच किया है और तब से ही वो लोग दिल्ली और हरियाणा के बार्डर पर धरना दे रहे हैं।












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