Kisan Andolan: इस बार किसान आंदोलन से 'बेफिक्र' क्यों लग रही है बीजेपी, चुनाव है पर 'चिंता' नहीं?

बीजेपी इस बार किसान आंदोलन को लेकर पिछली बार की तरह चिंतित नहीं दिख रही है। जबकि, लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। 2021 में मोदी सरकार ने आनन-फानन में तीनों कृषि कानून वापस लेकर आंदोलन रुकवाया था। तब यूपी में चुनाव होने थे। लेकिन, अबकी बार सरकार का अंदाज अलग है।

भाजपा के लोग मानते हैं कि चुनाव से पहले इस तरह के प्रदर्शन से दिक्कत तो है और इससे पंजाब में उसे मुश्किल हो सकती है। लेकिन, साथ ही साथ उन्हें यह भी उम्मीद है कि इसका हरियाणा और पश्चिमी यूपी में अबकी पिछली बार वाली परेशानी नहीं होगी।

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किसान आंदोलन पर फ्रंट फुट पर खेलने की तैयारी
बीजेपी को यकीन है कि वह 'सभी फसलों पर एमएसपी के कानून की मांग के 'कुतर्क' का पर्दाफाश' कर देगी। सबसे पहले तो इसी कड़ी में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार का 2010 में इसपर संसद के उस स्टैंड का खुलासा कर दिया गया है, कि किस तरह से उसने लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने की स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश ठुकरा दी थी। वही कांग्रेस अभी अलग जुबान में बोल रही है।

'अभी कानून बनाने की मांग कोई तर्क नहीं'
मसलन, एक बीजेपी नेता ने कहा है, 'जब संसद का सत्र खत्म हो चुका है...लोकसभा भंग होने वाली है और चुनावों की घोषणा होने वाली है, तब कानून बनाने की मांग का कोई तर्क नहीं है। इसका मतलब तब बनता, जब नई सरकार बनने के लिए बाद आंदोलन शुरू किया जाता।'

जब पिछली बार करीब एक साल तक किसानों का आंदोलन चला था, तब भाजपा को यह डर सता रहा था कि जाटों में नाराजगी की वजह से पश्चिमी यूपी, हरियाणा से लेकर पंजाब तक उसे करीब 40 लोकसभा सीटों का नुकसान हो सकता है। पंजाब और यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले थे।

इन दो वजहों से 'चिंतित' नहीं बीजेपी!
लेकिन, अबकी बार भाजपा को उम्मीद है कि उस तरह का खतरा पैदा होने की आशंका नहीं रह गई है। इसकी दो वजहें मानी जा रही हैं। जयंत चौधरी का आरएलडी, बीजेपी के साथ आ चुका है और चौधरी चरण सिंह को 'भारत रत्न' देने की घोषणा की गई है।

एक बीजेपी नेता के मुताबिक, 'जाटों में सम्मानित चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने से अगर जाट किसानों में कोई नाराजगी होगी भी तो वह कम हो जाएगी। पार्टी को नहीं लगता कि मौजूदा आंदोलन उसी तरह से प्रभावी होगा।'

माहौल खराब करने वालों से सावधान रहें- केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री
बीजेपी और केंद्र सरकार लगातार यह बात उजागर करना चाहती है कि किसानों के नाम पर कुछ लोग पीछे से राजनीति कर रहे हैं। किसान संगठनों से बातचीत में शामिल केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है, 'वहां कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं, जो समाधान नहीं चाहते हों, बल्कि समस्या देखना चाहते हों। इसलिए मैं किसानों से कहूंगा कि उन लोगों से सावधान रहें जो माहौल खराब करना चाहते हैं।'

आंदोलनकारी दिल्ली क्यों जाना चाहते हैं- अनिल विज
हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने इस आंदोलन के पीछे की मंशा को लेकर बार-बार सवाल उठाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि 'जब केंद्र सरकार यहां आकर किसानों से बातचीत कर रही है तो फिर वे दिल्ली क्यों जाना चाहते हैं। शायद उनका इरादा कुछ और है।'

'पंजाब सरकार चाहती है कि किसान आतंक पैदा करें'
अब तो उन्होंने सीधे पंजाब सरकार पर ही उंगली उठा दी है। उन्होंने कहा है, 'पंजाब सरकार चाहती है कि किसान आतंक पैदा करें। पंजाब सरकार दिल्ली में आतंक पैदा करना चाहती है। पंजाब ने किसानों को रोका नहीं, पत्थरबाजी में हमारे अधिकारी जख्मी हुए हैं।'

भाजपा बार-बार कर रही है इसके पीछे की राजनीति की ओर इशारा
एक और भाजपा नेता का कहना है कि यह सब तब हुआ है, जब पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच लोकसभा चुनावों को लेकर बातचीत की खबरें आई हैं। इस गठबंधन से पंजाब के परिणाम पर असर पड़ सकता है। शायद यही वजह। 2021 के आंदोलन में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी ही आंदोलन का केंद्र था, शायद यह बताने की कोशिश हो रही है कि ये राज्य बीजेपी के खिलाफ हैं।'

भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी 'इस आंदोलन के पीछे विपक्ष की राजनीति' को उजागर करने के लिए एक व्यापक अभियान चला सकती है। पार्टी समाज के प्रबुद्ध लोगों और विभिन्न समुदायों के नेताओं के पास जाकर यह समझाने की कोशिश कर सकती है कि एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग तर्क पर आधारित नहीं है और इससे आखिरकार किसानों को ही नुकसान होगा।

सूत्रों का ये भी कहना है कि पंजाब समेत कोई भी राज्य सरकार इसे कानूनी मान्यता देने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन, पंजाब में भाजपा के कुछ नेताओं को लगता है कि इस आंदोलन से प्रदेश में पार्टी को नुकसान हो सकता है।

हालांकि, पार्टी में कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं को भी शामिल किया है, लेकिन फिर भी राज्य इकाई वेट एंड वॉच की स्थिति में है।

वैसे बीजेपी नेताओं को लगता है कि किसानों के इस आंदोलन के खिलाफ एक 'विपरीत ध्रुवीकरण' के भी आसार हैं, जिसका फायदा उसे हरियाणा से लेकर यूपी तक में मिल सकता है।

इसका बेहतर उदाहरण यूपी विधानसभा चुनाव है। जहां लखीमपुर खीरी और पीलीभीत लोकसभा क्षेत्रों में सिख मतदाताओं की संख्या भरपूर है। लेकिन, बीजेपी ने इनकी सारी की सारी विधानसभा सीटें जीत ली थी।

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