Farmers Protest: 'आंदोलन में खालिस्तानी कर रहे हैं मदद', इस पर SC ने मांगा केंद्र से हलफनामा
Khalistanis have infiltrated the farmers protests: Centre says in SC: कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को अगले आदेश तक कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि 'हम कृषि कानूनों की वैधता को लेकर चिंतित हैं इसका समाधान जरूर निकलना चाहिए।' बता दें कि कोर्ट ने अब इस मसले को सुलझाने के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है।

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सरकार और किसानों के बीच लंबे वक्त से चल रही बातचीत का हल ना निकलने पर सुप्रीम कोर्ट ने ये कदम उठाया है।इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे पास एक आवेदन है जिसमें कहा गया है कि 'आंदोलन में खालिस्तानी मदद कर रहे हैं। इस पर अटॉर्नी जनरल जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हमने कहा था कि प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है। जिसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो केंद्र सरकार कल तक इस बारे में हलफनामा दे, जिसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम हलफनामा भी देंगे और आईबी रेकॉर्ड जमा कराएंगे।
कोर्ट की कमेटी में 4 लोग शामिल होंगे
आपको बता दें कि कोर्ट की ओर से जो कमेटी बनाई गई है, उसमें चार लोग शामिल होंगे और ये चार लोग भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल घनवंत हैं। कमेटी के गठन वाले फैसले का अटॉर्नी जनरल की ओर से स्वागत किया गया है। जिस पर कोर्ट ने कहा कि यह किसी पक्ष के लिए जीत नहीं होगी, बल्कि कानून की प्रक्रिया के जरिए जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया किसान संगठनों को नोटिस
यही नहीं नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों को भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 26 जनवरी पर किसान संगठनों की तरफ से प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को लेकर जारी किया गया है। दरअसल दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गणतंत्र दिवस पर प्रस्तावित किसानों की ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस भेजा है।












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