बुरी खबर: 'एक मुलाकात जरूरी है सनम' गीत गाने वाले दिग्गज कव्वाली सिंगर सईद साबरी का निधन
सईद साबरी ने 'देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए' और 'एक मुलाकात जरूरी है सनम' जैसे मशहूर गीत गाए थे।
जयपुर, 7 जून: कोरोना वायरस महामारी के बीच पिछले एक साल में फिल्म इंडस्ट्री इरफान खान, ऋषि कपूर, सुशांत सिंह राजपूत, वाजिद खान, सरोज खान, नरेंद्र चंचल और राजीव कपूर जैसे कई दिग्गज कलाकारों को खो चुकी है। 2020 की तरह साल 2021 भी बॉलीवुड के लिए कुछ ठीक साबित नहीं हो रहा है और बुरी खबरों का दौर जारी है। इस बीच फिल्म जगत से जुड़ी एक और मनहूस खबर सामने आई है। दिग्गज कव्वाली सिंगर और मशहूर साबरी ब्रदर्स के पिता सईद साबरी का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया है।

दो महीने पहले हुआ था बेटे का निधन
साबरी परिवार पर पिछले दो महीने में दूसरी बार दुखों का पहाड़ टूटा है। बीते 1 अप्रैल को सईद साबरी के बेटे फरीद का भी अस्पातल में निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि 85 साल के सईद साबरी को रविवार को नहाते समय बाथरूम में हार्ट अटैक आया और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। सईद साबरी ने बॉलीवुड में कई फिल्मों को ऐसे गाने दिए, जो आज भी यादगार हैं।

'जो हमारे पिता कर सकते थे, हम सोच भी नहीं सकते'
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सईद साबरी के निधन की जानकारी देते हुए उनके बेटे अमीन साबरी ने बताया, 'हम सभी के लिए ये एक बहुत बड़ा सदमा है, क्योंकि जो कुछ मेरे पिता हासिल कर सकते थे, हम वो सब हासिल करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। हम तीनों ने एक साथ मुंबई में आमिर खान के घर सहित कई बड़े कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी। कोरोना वायरस महामारी से पहले भी हम अलग-अलग इवेंट में परफॉर्म कर रहे थे।'

'देर ना हो जाए कहीं...' गीत से मिली पहचान
अमीन साबरी ने आगे बताया, 'मेरे पिता सईद ने फिल्म 'हीना' के लिए दिग्गज गायिका लता मंगेशकर के साथ 'देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए' गीत रिकॉर्ड किया था, जो आज भी याद किया जाता है। हालांकि, बाद में फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर को एहसास हुआ कि उस गाने के लिए उन्हें हम तीनों की जरूरत थी। इस गीत के रिकॉर्ड होने के बाद हम लोगों को एक खास पहचान मिली और दुनिभार से हमें इवेंट के लिए बुलाया जाने लगा।'

'एक मुलाकात जरूरी है सनम' गीत भी गाया
आपको बता दें कि सईद साबरी ने अपने बेटों के साथ गीत 'एक मुलाकात जरूरी है सनम' भी रिकॉर्ड किया था, जो काफी पसंद किया गया। हालांकि, सईद साबरी को अपने गीतों के लिए कोई पुरस्कार ना मिलने का मलाल हमेशा रहा। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि उनके गीतों के लिए उन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं दिया गया और अब हिंदी सिनेमा से उनका मोहभंग हो गया है।

'नहीं मालूम कि टैलेंट को बेचते कैसे हैं'
इस इंटरव्यू में सईद साबरी ने अपना रोष जाहिर करते हुए कहा, 'हम लोग ये तो जानते हैं कि अच्छा गाना कैसे गाएं, लेकिन ये नहीं मालूम कि अपने टैलेंट को बेचें कैसे। ना तो हम चापलूसों की तरह काम कर सकते हैं और ना ही संगीत निर्देशकों के आसपास मंडरा सकते हैं। हमारे गीत सुनने वाले दर्शकों और श्रोताओं की दाद ही हमारा अवॉ़र्ड है।' निधन के बाद जयपुर के घाट गेट स्थित कब्रिस्तान में सईद साबरी का अंतिम संस्कार किया गया।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने जताया दुख
वहीं, सईद साबरी के निधन पर राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी दुख जताया। हनुमान बेनीवाल ने अपने फेसबुक पेज पर सईद साबरी के निधन की खबर शेयर करते हुए लिखा, 'जयपुर के मशहूर कव्वाल सईद साबरी जी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। अपनी कला से उन्होंने ना केवल देश, बल्कि दुनिया के कई देशों में भारत का नाम रोशन किया है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवगंत आत्मा को अपने श्री चरणों मे स्थान प्रदान करें व उनके परिजनों को सम्बल प्रदान करें।'












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