FACT CHECK: हाथ में डंडा लिए पुलिस को चुनौती देते बुजुर्ग किसान की वायरल फोटो के पीछे की कहानी

नई दिल्‍ली। किसान क्रांति यात्रा लेकर दिल्ली पहुंचे किसानों ने आखिरकार अपना मार्च वापस ले लिया। बुधवार तड़के किसान नेता नरेश टिकैत ने इसका ऐलान किया। मंगलवार देर रात किसान मार्च को दिल्ली में एंट्री दी गई थी। एंट्री के बाद ये सभी सीधे किसान घाट पहुंचे और वहां जाकर हड़ताल खत्म कर दी। इस प्रदर्शन में किसान और जवान आमने सामने आए और पुलिस ने लाठियां भी भांजी। लेकिन इन सबसे अलग एक ऐसी तस्‍वीर सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी। क्‍या आम क्‍या खास, सभी ने इस तस्‍वीर की अपनी हिसाब से व्‍याख्‍या की। लेकिन जरूरी है इस बात को जानना कि किन हालात में ये फोटो बनी। इस फोटो में जो दिख रहा है उसके आगे क्‍या था और ऐसा क्‍या है जो इस फोटो में दिख नहीं रहा। तो आइए आपको बताते हैं इस तस्‍वीर की सच्‍चाई जो खुद इसे कैमरे में कैद करने वाले फोटोग्राफर ने India Today से खास बातचीत में बताई है।

रवि चौधरी ने क्‍लिक की है ये फोटो, उन्‍होंने बताया पूरा सच

रवि चौधरी ने क्‍लिक की है ये फोटो, उन्‍होंने बताया पूरा सच

आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि रवि चौधरी वरिष्‍ठ फोटो पत्रकार हैं और समाचार एजेंसी पीटीआई से जड़े हुए हैं। रवि ने बताया कि '' हमें जानकारी थी कि किसान आज दिल्ली में दाखिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें दिल्ली-यूपी बॉर्डर के पास रोक सकती है। मैं सुबह सात बजे ही यहां पहुंच गया था। काफी देर इंतजार करने के बाद किसानों का एक छोटा समूह 9 बजे के आसपास पहुंचा। लगभग 11 बजे के आसपास करीब 5 हजार किसान आ गए। कुछ किसान पीछे, थोड़ी दूरी पर रुके हुए थे। किसानों के रास्ते में यूपी पुलिस की भी एक बैरिकेडिंग थी।

फ्लाईओवर से क्‍लिक की रवि ने ये फोटो

फ्लाईओवर से क्‍लिक की रवि ने ये फोटो

बैरिकेड को किसानों ने हटा दिया और यूपी पुलिस के जवानों ने भी एक तरह से उन्हें रास्ता दे दिया। अब किसानों का जत्था अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ दूसरी बैरीकेड के पास पहुंचा। ये बैरीकेड दिल्ली पुलिस ने लगाया था। एक तरफ़ जोश से भरे किसानों का जत्था और बैरीकेड के दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस के जवान और वॉटर कैनन की गाड़ियां खड़ी थीं। मैं अपने कुछ फ़ोटोग्राफर साथियों के साथ इस सड़क से लगे फ्लाईओवर पर खड़ा था।

अचानक गई नजर, बड़ा मार्मिक लगा सबकुछ

पुलिस ने काफी देर तक किसानों पर पानी बरसाया और आंसू गैस के गोले दागे। किसान इस एक्शन से तितर-बितर हो गए। उनके झंडों में से कपड़ा गायब हो गया और उनके हाथ में केवल डंडे रह गए। किसानों ने पुलिस की तरफ कुछ-कुछ फेंकना शुरू किया। उनमें काफी गुस्सा था। तभी मुझे दिखा कि सड़क के किनारे कुछ हो रहा है। मैंने अपने कैमरे का जूम बढ़ाया तो दिखा कि पुलिस के डंडे के जवाब में एक बुजुर्ग किसान ने भी डंडा उठाया हुआ है। मुझे यह दृश्य काफी मार्मिक लगा।

ये है फोटो की सच्‍चाई

ये है फोटो की सच्‍चाई

तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक तरफ पुलिस के कई जवान हैं वहीं दूसरी तरफ वो (किसान) अकेले खड़े हैं। इस तस्वीर में व्यवस्था की ताकत को एक बुजुर्ग किसान का गुस्सा, चुनौती दे रहा है। मानों वो कह रहा है, हम हारे नहीं हैं। लेकिन ये तो तस्‍वीर का एक पहलू है। दूसरा पहलू ये कि वो किसान अकेले नहीं थे बल्‍कि उनके साथ किसानों को एक छोटा ग्रुप था जिसे आप इस फोटो में देख सकते हैं।

तस्‍वीर में यूपी पुलिस नहीं बल्‍कि दिल्‍ली पुलिस है

तस्‍वीर में यूपी पुलिस नहीं बल्‍कि दिल्‍ली पुलिस है

रवि से जब पूछा गया कि पीटीआई ने फिर अकेले किसान वाली तस्‍वीर क्‍यों जारी की तो उन्‍होंने बताया कि 'एक तस्‍वीर के कई वर्जन होते हैं, एजेंसी को ये वर्जन ज्‍यादा पॉवरफुल लगा तो जारी कर दिया गया।' रवि ने बताया कि सोशल मीडिया पर इसे गलत तरीके से पेश किया गया। रवि ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर इसे यूपी पुलिस की बर्बरता बताई जा रही है लेकिन इसमें दिल्‍ली पुलिस के जवान हैं। रवि का कहना है कि 'मुझे लगता है कि ये तस्वीर तब-तब याद की जाएगी जब-जब किसानों के विरोध का जिक्र होगा।

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