Explained: वक्फ एक्ट में बदलाव से इसपर क्या होगा असर? संसद में पेश Waqf bill के बारे सबुकछ समझिए
Waqf bill 2024 means: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया है। विपक्ष के भारी विरोध के बीच फिलहाल इस वक्फ बिल को संयुक्त संसदीय समिति में भेजा गया है।
मोदी सरकार का वक्फ बिल लाने का मुख्य उद्देश्य वक्फ की संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से व्यवस्थित करना और इसकी निगरानी का दायरा बढ़ाना है। नया विधेयक संसद से पास होने के बाद वक्फ एक्ट-1995 की जगह लेगा।

नया वक्फ कानून किस नाम से जाना जाएगा?
संशोधित बिल पास हो जाने के बाद वक्फ एक्ट-1995 को एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम ( Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development Act) के नाम से जाना जाएगा।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 में लगभग 40 संशोधनों का प्रस्ताव
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में प्रस्तावित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 में मौजूदा वक्फ कानून-1995 में करीब 40 संशोधनों का प्रस्ताव रखा है।
वक्फ एक्ट में बदलाव से क्या असर होगा?
प्रस्तावित कानून में वही व्यक्ति अपनी चल या अचल संपत्ति धार्मिक या धर्मार्थ कार्यों के लिए 'वक्फ' कर सकता है, जो कम से कम पांच वर्ष से इस्लाम धर्म का पालन कर रहा हो।
मौजूदा कानून में वक्फ बोर्ड के पास जो कुछ शक्तियां हैं, उसका इस्तेमाल अब कलेक्टर करेगा। वक्फ की संपत्ति के सर्वे के लिए पहले राज्य सरकार को सर्वे कमिश्नर की नियुक्ति करना होता था, प्रस्तावित कानून में यह जिम्मेदारी कलेक्टर को दे दी गई है।
इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि कोई प्रॉपर्टी वक्फ की है या सरकारी जमीन है, यह तय करने का अधिकार अब जिला कलेक्टर का होगा। मौजूदा कानून में यह अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है।
सेंट्रल वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व
प्रस्तावित विधेयक में वक्फ प्रबंधन में व्यापक सुधार किए गए हैं। इसके तहत सेंट्रल वक्फ काउंसिल के साथ-साथ राज्य वक्फ बोर्ड के गठन में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। सेंट्रल काउंसिल में कम से कम दो महिलाओं और कम से कम दो गैर-मुसलमानों की नियुक्ति का प्रावधान रखा गया है।
पिछड़े वर्ग मुसलमान, बोहरा और अगाखानी को भी निश्चित प्रतिनिधित्व
इसी तरह से राज्यों में वक्फ बोर्ड में भी बाकी प्रावधान तो लगभग पहले जैसे हैं, सिर्फ दो महिला सदस्यों और दो गैर-मुसलमानों का प्रतिनिधित्व रखा गया है। इतना ही नहीं कम से कम एक सदस्य शिया, सुन्नी और मुसलमानों में पिछड़े वर्ग से भी होना जरूरी है। इनके अलावा अगर राज्य में वक्फ कार्यरत है तो बोहरा और अगाखानी में से भी उसमें एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा।
वक्फ की संपत्तियों की ऑडिट करवा सकता है केंद्र
यही नहीं, प्रस्तावित विधेयक में केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) की ओर से नियुक्त ऑडिटर के माध्यम से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की ऑडिट करवा सकती है।
नए बिल में वक्फनामा का प्रावधान
प्रस्तावित कानून का एक और महत्वपूर्ण पहलू वैध वक्फनामा का प्रावधान है। अगर कोई अपनी संपत्ति को वक्फ करना चाहता है तो यह आधिकारिक दस्तावेज की तरह काम करेगा, जो कि लिखित सबूत की तरह होगा। मौजूदा कानून में सबकुछ मौखिक की गुंजाइश है।
वक्फ कानून में संशोधन के विरोधी मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कहा है कि वक्फ बोर्ड के कानूनी दर्जा और अधिकारों में किसी तरह की दखल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एआईएमआईएम के चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का आरोप है कि मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता छीनना चाहती है और इसके माध्यम से मुसलमानों की संपत्ति हड़पने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस समेत इंडिया ब्लॉक के तमाम सहयोगियों और कुछ गैर-संबद्ध राजनीतिक दलों ने भी वक्फ बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2024 का विरोध किया है।
वक्फ कानून की क्यों होती है आलोचना?
वक्फ कानून इसलिए निशाने पर है, क्योंकि इसकी वजह से जमीन घोटाले के आरोप लग रहे हैं। वक्फ बोर्ड के पास इतने अधिकार हैं कि कथित तौर पर किसी की भी संपत्ति पर दावा ठोकना उसकी आदत बन गई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का नजरिया बना नजीर
अभी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक जज की भी टिप्पणी खूब वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने वक्फ बोर्ड की ऐसी शक्तियों को सिरे से नकार दिया है। यहां वक्फ बोर्ड ने बुरहानपुर में ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) संरक्षित तीन प्राचीन स्मारकों पर दावा ठोक दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया है।
वक्फ के चौंकाने वाले विवादित दावे
हाल के वर्षों में कई ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं, जिसपर दावों की वजह से वक्फ बोर्ड हंसी का पात्र बनता रहा है तो सरकार समेत आम लोगों की चिंता बढ़ने की वजह भी रहा है। इनमें मुकेश अंबानी का घर एंटीलिया, गुजरात में बेट द्वारका स्थित दो द्वीप, हैदराबाद में आईएसबी, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और लैंको की संपत्तियां, कोलकाताक का टॉलीगंज क्लब, रॉयल कलकत्ता गोल्फ क्लब, बेंगलुरु में आईटीसी विंडसर होटल और तमिलनाडु में एक पूरा गांव और वहां का 1500 वर्ष पुराना एक मंदिर भी शामिल है, जिसपर दावा ठोकने में वक्फ ने जरा भी देर नहीं लगाई।
वक्फ क्या है?
सामान्य भाषा में बात करें तो वक्फ का मतलब वह संपत्ति है, जो इस्लामी कानून के तहत सिर्फ धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों के इरादे से समर्पित की गई है। अगर किसी संपत्ति को एक बार वक्फ घोषित कर दिया गया, तो इसमें बदलाव नहीं हो सकता। मोदी सरकार जो संशोधन विधेयक लेकर आई है, उसका मकसद इसी चिंता का समाधान खोजना है।
भारत में इस समय लगभग 30 वक्फ बोर्ड हैं, जिसके पास 9.4 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है, जो दुनिया के 50 मुल्कों से भी ज्यादा है। वक्फ के पास जो 8 लाख से ज्यादा संपत्तियां हैं, उनकी अनुमानित कीमत मात्र 1.2 लाख करोड़ रुपए बताई जाती है। लेकिन, उसके पास जितनी जमीन है, वह सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा है।
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