क्या है वह एक्सरसाइज जिस पर ममता ने मचाया है इतना हल्ला
भारतीय सेना की जिस एक्सरसाइज से इतना घबरा गई हैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वह दरअसल हर वर्ष दो बार देश भर में होती है। इस तरह की एक्सरसाइज से सेना कई अहम जानकारियों को जुटाती है।
नई दिल्ली। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल से लेकर संसद तक हर तरफ हंगामा मचा हुआ था और वजह थी कि सेना की पश्चिम बंगाल के टोल नाकों पर मौजूदगी। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो सेना पर तख्तापलट की कोशिशों का ही आरोप लगा दिया।

सरकार और सेना ने दी सफाई
बाद में सेना और सरकार दोनों ने ही ममता के इन आरोपों से इंकार कर दिया है। ईस्टर्न कमांड को खुद आगे आकर इस बारे में स्पष्टीकरण देना पड़ा।
यहां तक कि उन चिट्ठियों को भी सार्वजनिक करना पड़ा जो कोलकाता पुलिस को एक्सरसाइज के लिए लिखी गई थीं।जानिए आखिर यह आर्मी एक्सरसाइज क्या होती है और इसकी क्या अहमियत है।
साल में दो बार होती है एक्सरसाइज
- दरअसल इस तरह की एक्सरसाइज सेना की ओर से साल में दो बार की जाती है।
- सेना इस तरह की एक्सरसाइज के जरिए भार ढोने वाली गाड़ियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करती है।
- सेना के जवान गाड़ियों की जानकारी पर नोट्स बनाते हैं जिसमें उनके भारत ढोने की क्षमता भी होती है।
- इसके साथ ही साथ वह इस बात को भी नोट करते हैं कि गाड़ियां किस अंतराल में गुजरती हैं।
- इस डाटा को बाद में एक साथ कंपाइल किया जाता है।
- कंपाइल करने के बाद इस डाटा को सब एरिया हेडक्वार्टर के लोकल कमांडर को दिया जाता है।
- जब कभी भी परिचालन संबंधी गतिविधियां होती हैं तो इस डाटा की मदद ली जाती है।
- यह डाटा तब मदद करता है जब सेना को ट्रूप्स या फिर उपकरणों को दूसरी जगह पर ले जाना पड़ता है।
- इसके अलावा सेना के पास मौजूद काफिले में यह डाटा एक अतिरिक्त जानकारी की तरह होता है।
कभी-कभी इस तरह के व्हीकल्स को सेना किराए पर भी लेती है और उसके लिए सेना की ओर से एक तय रकम अदा की जाती है। इस तरह की एक्सरसाइज हमेशा राज्य सरकार की सलाह लेकर ही अंजाम दी जाती हैं।












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