24 हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स नहीं हुए बैन तो खत्‍म हो जाएगा उत्‍तराखंड!

Uttrakhand-flood
देहरादून। जून 2013 को उत्‍तराखंड में बादल फटने के बाद आई भयानक बाढ़ को कौन भूला सकता है। इस त्रासदी को जल्‍द ही एक साल पूरा हो जाएगा। त्रासदी के समय विशेषज्ञों की ओर से अनुमान लगाया था कि विकास के नाम पर राज्‍य में जिन कामों को अंजाम दिया जा रहा है, दरअसल वही इसके विनाश की वजह बने हैं और आने वाले समय में बन सकते हैं।

सभी विशेषज्ञों की ओर से जो भी अनुमान लगाए गए थे वह आखिरकार सही साबित हुए। सुप्रीम कोर्ट में जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि भी हो गई है। एक एक्‍सपर्ट पैनल की ओर से कहा गया है कि राज्‍य में जारी हाइड्रो प्रोजेक्‍ट्स की वजह से ही यहां पर जून में भयानक बाढ़ आई जो हजारों लोगों की मौत की वजह बनी। एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 11 लोगों के एक पैनल की ओर से जो रिपोर्ट दाखिल की गई है, उसमें इस बात की पुरजोर वकालत की गई है कि पूरे राज्‍य में छोटी लेकिन कई अहम नदियां हैं और जिन्‍हें बचाया जाने की सख्‍त जरूरत है। रिपेार्ट में कहा गया है कि इस राज्‍य में स्थित नदियों को इको-सेंसटिव जोन घोषित किया जाए और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से तुरंत 'रिवर रेगुलेशन जोन' की अधिसूचना जारी की जाए। साथ ही सभी हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स को यहां पर बैन किए जाने की भी सिफारिशें की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्‍त 2013 को पर्यावरण मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह एक एक्‍सपर्ट पैनल का गठन करे। साथ ही मंत्रालय इस बात का भी पता लगाए कि उत्‍तराखंड त्रासदी के पीछे यहां पर मौजूद और निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्‍ट्स का कितना प्रभाव पड़ा है साथ ही मंत्रालय अलकनंदा और भागीरथी नदी के बेसिन पर स्थित जैविकीय परिस्थितियों पर इन 24 प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट्स के संभावित असर का भी अनुमान लगाए।

पैनल की ओर से सुप्रीम कोर्ट को की गई इन सिफारिशें इस पर्वतीय श्रंखला में मौजूद सभी हाइड्रो पावर परियोजनाओं के लिए नई मुसीबतें पैदा कर सकती हैं।

पैनल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया है कि अलकनंदा और भागरीथी नदियों के बेसनि पर जारी कई हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स जून 2013 के जैसी कई त्रासदियों की वजह बन सकते हैं और ऐसे में इन्‍हें तुरंत बंद किया जाए।

इस कमेटी में शामिल एक सीनियर मेंबर की ओर से बताया गया है कि पैनल के ज्‍यादातर सदस्‍य इस बात पर सहमत हैं कि राज्‍य में मौजूद हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स उत्‍तराखंड के वातावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बात को साबित करने के लिए कई सुबूत भी मौजूद हैं।

पैनल के मुताबिक राज्‍य में प्रस्‍तावित 24 प्रोजेक्‍ट्स का उत्‍तराखंड में जैविकीय प्रभाव होग। ऐसे में गंगोत्री के इको-सेंसटिव जोन और नेशनल पार्कों और सेंचुरीज के आसपास स्थित इन प्रोजेक्‍ट्स के काम को रोकना बहुत ही जरूरत है।

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