Exclusive: जम्मू आतंकी हमला- पाक-चीन के सामने मजाक बना भारत

Terror Attack
जम्मू के पास कठुआ में शुक्रवार की सुबह हुए आतंकी हमले के लिये आप किसे जिम्मेदार मातने हैं? अगर आप केंद्र सरकार को जिम्मेदार मानते हैं, तो अगर कांग्रेस की सरकार दोबारा आयी तो अगले पांच सालों में ऐसे हमलों से निजात नहीं मिलने वाली, क्योंकि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में देश की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति को कोई अहमियत नहीं दी है। और इस बात से रिटायर्ड मेजर जनरल गगन दीप बख्शी और डिफेंस एक्सपर्ट भरत वर्मा भी सहमत हैं।

यूं तो पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से इन सभी मुद्दों पर सरकार की ओर से कोई भी बड़ा कदम नहीं उठाया गया है लेकिन जनवरी 2013 से हालात बिगड़ते ही गए। चाहे वह पाकिस्तान आर्मी की ओर से सेना के दो जवानों का सिर काट कर ले जाने वाली घटना हो या फिर चीन की ओर से अक्सर घुसपैठ की खबरें हों, या फिर इटैलियन मरीन का मुद्दा हो, सरकार की ओर से कभी कोई ऐसा बड़ा और ठोस कदम नहीं उठाया गया जिससे पड़ोसियों की तरफ कड़ा संदेश जाता। ऐसे में हमने जानने की कोशिश की कि क्या सरकार के लिए सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दे कोई अहमियत नहीं रखते हैं और क्या उसके लिए सिर्फ वोट बैंक की पॉलिसी का ही महत्व है?

देश बड़े खतरे की ओर अग्रसर

रिटायर्ड मेजर जनरल गगनदीप बख्शी से एक्सक्लूसिव बातचीत करने पर उनका गुस्सा साफ नजर आया। जनरल बख्शी ने वनइंडिया से कहा कि वर्तमान यूपीए सरकार ने न तो राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कुछ खास किया और न ही विदेश नीति को लेकर कोई ठोस कदम उठाया है। चाहे इटैलियन मरीन वाला मुद्दा हो या फिर चीन की ओर से घुसपैठ की खबरें, सरकार को कोई चिंता ही नहीं है। जनरल बख्शी के मुताबिक उन्हें सरकार से कोई उम्मीद भी नहीं थी, लेकिन जब घोषणा पत्र जारी हुआ तो कांग्रेस पार्टी ने यह साबित कर दिया कि उसकी नजरों में देश और सेनाओं की क्या अहमियत है। जनरल बख्शी मानते हैं कि अब एक बड़े बदलाव की सख्त जरूरत है और केंद्र में एक मजबूत और राष्ट्रवादी सरकार का आना देश की भलाई के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर यह देश एक बड़े खतरे की ओर बढ़ चुका है।

डिफेंस एक्सपर्ट भरत वर्मा, रिटायर्ड मेजर जनरल बख्शी का रिएक्शन

पाक, चीन की नजरों में बड़ा मजाक बना भारत

जाने-माने रक्षा विशेषज्ञ और इंडियन डिफेंस रिव्यू के लेखक भरत वर्मा ने एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि जम्मू के कठुआ में हुए आतंकी हमले ने यह साबित कर दिया कि अब आतंकियों का निशाना सेना के जवान ही नहीं बल्कि वे भारतीय सेना के हथ‍ियारों को भी नेस्तनाबूत करना चाहते हैं। आतंकियों से अलग नक्सली अक्सर अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाते रहते हैं। सरकार की ओर से कई तरह के ऐलान तो अक्सर किए जाते हैं लेकिन कोई भी बड़ा कदम नहीं उठाया जाता। इन सबके बीच ही गुरुवार को इटली ने इटैलियन मरीन के मुद्दे पर अमेरिका से बात की। साफ है कहीं न कहीं भारत खुद को कमजोर साबित कर रहा है।

पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख हाफिज सईद अक्सर कभी वेबसाइट तो कभी जनसभा में देश को धमकी देता रहता है लेकिन भारत की ओर से कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। के मुताबिक जिस तरह से भारत सरकार की ओर से विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा और बाहृय सुरक्षा जैसे मुद्दों को डील किया जा रहा है उसकी वजह से हम पाक और चीन की नजरों में एक बड़ा मजाक बनकर रह गए हैं।

विदेश नीति जैसा कोई बिंदु ही नहीं सरकार के पास

भरत वर्मा के मुताबिक घोषणा पत्र में कांग्रेस की ओर से इन मुद्दों पर ध्यान न देने से साफ है कि यह मुद्दे उसके लिए कोर्इ अहमियत ही नहीं रखते हैं। पिछले 10 वर्षो में विदेश नीति, आतंरिक और बाहृय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हालात बद से बदतर होते गए हैं। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार सिर्फ 'गांधीगिरी' में यकीन करती है। भरत वर्मा की मानें तो सरकार के पास कभी विदेश नीति जैसा कोई अहम बिंदु रहा ही नहीं। वर्तमान सरकार ने विदेशी नीति से लेकर सुरक्षा तक के मुद्दों पर सबकुछ चौपट करके रख दिया है। भरत वर्मा की मानें तो साफ है कांग्रेस के लिए वोट बैंक पॉलिसी की अहमियत सबसे ज्यादा है और इन मुद्दों पर उसकी कभी कोई ठोस राय हो ही नहीं सकती है।

जनरल बख्शी और भरत वर्मा दोनों ही इस बात से सहमत नजर आते हैं कि कमजोर नीतियों की वजह से सेनाओं का आत्मबल कमजोर होता है। वहीं पूरी दुनिया में जो पहचान कायम की है वह भी हल्की होती नजर आने लगती है। जब तक सरकार के पास एक मजबूत नीति नहीं होगी तब तक आतंकवादी, नक्सलवाद और दूसरे मुद्दों को कभी भी सुलझाया नहीं जा सकेगा।

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