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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अब-तक नहीं मिला सरकारी बंगला! अब कहां रहने को होंगे मजबूर?

Former Vice President Jagdeep Dhankhar: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अभी तक उनका सरकारी आवंटित बंगला नहीं मिल पाया है। ऐसे में उन्हें अस्थायी व्यवस्था में शिफ्ट होना पड़ सकता है। यह स्थिति उस परंपरा से अलग है, जो आमतौर पर पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के लिए देखी जाती है।

सूत्रों के मुताबिक, 34, एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग का बंगला धनखड़ के नाम तय किया गया है, लेकिन वहां अभी भी एक केंद्रीय मंत्री रह रहे हैं। उनके शिफ्ट होने और आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने में समय लग रहा है। सरकार का कहना है कि यह देरी महज तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से है, इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं है।

Jagdeep Dhankhar

जगदीप धनखड़ को बंगला मिलने में लग सकता है 2 से 4 महीने का वक्त

सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) को बंगले को खाली कराने, रेनोवेशन और सुरक्षा इंतजाम पूरे करने में कम से कम दो से चार महीने का वक्त लगेगा। इस बीच जगदीप धनखड़ के पास दो विकल्प हैं-या तो अस्थायी सरकारी आवास लें या फिर निजी घर में रहने का फैसला करें। हालांकि, निजी घर में रहना पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए अब तक एक अभूतपूर्व स्थिति मानी जाएगी।

इससे पहले पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी कुछ दिन इंतजार करना पड़ा था, हालांकि उनके लिए अस्थायी सरकारी आवास की व्यवस्था कर दी गई थी।

दिल्ली में टाइप VIII बंगले की उपलब्धता आसान नहीं होती, क्योंकि इसके लिए पहले मौजूदा निवासी को शिफ्ट करना, फिर सुरक्षा और अन्य संशोधन पूरे करना जरूरी होता है। यही वजह है कि प्रक्रिया अक्सर तीन महीने से ज्यादा लंबी खिंच जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि जगदीप धनखड़ का हक बरकरार है और निर्धारित बंगला उन्हें जरूर मिलेगा। लेकिन देश की सत्ता के केंद्र में यह स्थिति इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह दुर्लभ है कि भारत के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति को प्राइवेट घर में रहने पर मजबूर होना पड़े।

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अमित शाह का बयान: स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर जारी अटकलों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (25 अगस्त) को कहा कि जगदीप धनखड़ साहब ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है। उन्होंने विपक्ष के इन दावों को भी सिरे से खारिज किया कि धनखड़ को "नजरबंद" किया गया था।

एएनआई को दिए इंटरव्यू में शाह ने कहा, "धनखड़ साहब का इस्तीफा पत्र अपने आप में स्पष्ट है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है और प्रधानमंत्री, मंत्रियों व सरकार के अन्य सदस्यों का आभार व्यक्त किया है कि उन्हें अच्छा कार्यकाल मिला।"

जब उनसे विपक्ष के इस आरोप पर सवाल किया गया कि जगदीप धनखड़ नजरबंद थे, तो अमित शाह ने जवाब दिया, "सच और झूठ की व्याख्या विपक्ष की बातों पर आधारित नहीं होनी चाहिए। हर मुद्दे पर अनावश्यक हंगामा नहीं करना चाहिए। धनखड़ साहब ने संवैधानिक पद संभाला था और पूरी तरह संविधान के अनुरूप अपने दायित्व निभाए। उन्होंने निजी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। इस पर ज्यादा अटकलें नहीं लगानी चाहिए।"

अमित शाह की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब विपक्षी दलों ने जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यहां तक कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ-साथ उन्हें "चुप कराने" की स्थिति भी देखने को मिली है।

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