EWS Reservation Congress की पहल का परिणाम, 2005 में मनमोहन सिंह के दौर में हुई शुरुआत
EWS Reservation Congress की पहल का परिणाम है। ऐसा कहना है कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का। EWS Reservation congress welcomes SC verdict upholding 103rd constitutional amendment
सुप्रीम कोर्ट ने EWS रिजर्वेशन के प्रावधान की संवैधानिकता को बरकरार रखा है। पांच जजों की संविधान पीठ ने 3-2 के बहुमत के फैसले में कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण भेदभाव करने वाला नियम नहीं है। दिलचस्प ये कि चीफ जस्टिस EWS Reservation के फेवर में नहीं रहे। कांग्रेस ने फैसले का स्वागत कर बताया है कि इसके बीज 2005 में ही पड़ गए थे।

कांग्रेस EWS रिजर्वेशन के साथ है
कांग्रेस सांसद और महासचिव जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा, कांग्रेस आज के सुप्रीम कोर्ट के 103 वें संवैधानिक संशोधन को बरकरार रखने के फैसले का स्वागत करती है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब चार साल के बाद आर्थिक आधार पर आरक्षण का रास्ता साफ हो गया। इस संवैधानिक संशोधन के तहत एससी / एसटी / ओबीसी के अलावा अन्य जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10% आरक्षण कोटा देने का अधिकार मिलता है।

डॉ मनमोहन सिंह की सरकार में हुई शुरुआत
जयराम रमेश ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का कानून बनने में कांग्रेस की भूमिका भी रेखांकित की। उन्होंने कहा, संविधान संशोधन 2005-06 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया का परिणाम है। उन्होंने बताया कि Sinho Commission की नियुक्ति की गई थी। आयोग ने जुलाई 2010 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। आयोग की रिपोर्ट पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया और विधेयक 2014 तक तैयार हो गया था।

संविधान संशोधन 2019 में रविशंकर प्रसाद के कार्यकाल में हुआ
गौरतलब है कि 2014 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार वापसी करने में असफल रही। लोक सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को प्रचंड बहुमत मिला। केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का गठन हुआ। इसके बाद 2019 में तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पेश किया, जिसे 103वां संविधान संशोधन कहा गया।











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