मजाक नहीं हक़ीक़त, हर भारतीय पर हैं 44,095 रुपये के कर्ज़

नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव के वक्त मोदी सरकार ने हर भारतीयों को सपना दिखाया था कि विदेशों से काला धन वापस लाने के बाद देश के हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपए आ जाएंगे, लेकिन एनडीए की सरकार बन जाने के कुछ दिनों बाद ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसे महज़ एक जुमला करार दिया था।

rupees

भले ही आपके खाते में 15 लाख रुपए सपना हो, लेकिन आपको चौंका देने वाली बात बता दें कि आपके माथे पर 44095 रुपए का कर्ज है। जी हां ये कोई जुमला नहीं बल्कि हकीकत है। देश में प्रत्येक व्यक्ति पर 44095 रुपए का कर्ज है जो कर्ज़ लगातार बढ़ता जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 में देश में प्रति व्यक्ति कर्ज जहां 41,129 रुपये था वहीं 2014-15 में यह 2,966 रुपये बढ़ कर 44,095 रुपये हो गया है। सरकार के द्वारा विकास के मद में हो रहे खर्च से प्रति व्यक्ति कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

दरअसल सरकार द्वारा विकास कार्यों में हो रहे खर्ज की वजह से ये कर्ज लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ल्ड बैंक के इंटरनेशनल डेट स्टेस्टिक्स 2015 के अनुसार, 20 विकासशील देशों की सूची में सबसे ज्यादा कर्ज में डूबने के मामले में भारत चौथे स्थान पर आ गया है।

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