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टेरर फंडिंग से जुड़े इंजीनियर राशिद का केस MP-MLA कोर्ट में होगा रेफर, एनआईए कोर्ट ने की सिफारिश

Engineer Rashid: टेरर फंडिंग मामले के आरोपी और बारामूला के सांसद राशिद इंजीनियर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, जम्मू कश्मीर टेरर फंडिंग मामले की सुनवाई कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने इस मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है।

एनआईए की सिफारिश पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इस केस को ट्रांसफर करने के लिए प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को भेज दिया है। अब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज 25 नवंबर को इस मामले पर फैसला करेंगी। न्यूज़ एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, एनआईए ने कहा कि इस मामले के आरोपी राशिद इंजीनियर अब सांसद हैं।

engineer rashid

इसलिए, अब इस मामले की सुनवाई उस कोर्ट में ट्रांसफर होनी चाहिए जो एमपी-एमएलए से संबंधित मामलों की सुनवाई करती है। इसके बाद कोर्ट ने इसपर फैसला लेने के लिए प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को भेज दिया। बता दें, कोर्ट आज ही राशिद इंजीनियर की जमानत याचिका पर भी फैसला सुनाने वाली थी।

लेकिन, अब यह फैसला कुछ और समय के लिए टल गया है। क्योंकि, अब जमानत याचिका पर कौन सी कोर्ट सुनवाई करेगी इस पर भी प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के फैसले के बाद ही तय हो पाएगा। बता दें, जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला से निर्दलीय लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद ने हाल ही में अपनी अंतरिम जमानत समाप्त होने के बाद तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था।

उन्हें अगस्त 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। जेल में रहने के बावजूद, राशिद ने जेल से 2024 के संसदीय चुनावों के लिए अपना नामांकन दाखिल किया और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ 204,000 मतों के अंतर से जीत हासिल की।

2022 में पटियाला हाउस स्थित एनआईए कोर्ट ने इंजीनियर राशिद और कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। इन लोगों में हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, ज़हूर अहमद वटाली, बिट्टा कराटे, आफ़ताब अहमद शाह, अवतार अहमद शाह, नईम खान और बशीर अहमद बट शामिल हैं।

ये आरोप जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग गतिविधियों की चल रही जांच का हिस्सा हैं। एनआईए का आरोप है कि लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और जेकेएलएफ जैसे कई आतंकवादी समूहों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर काम किया है। इन पर जम्मू-कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले करने का आरोप है।

जांच में दावा किया गया है कि इन संगठनों को हवाला चैनलों और अन्य गुप्त तरीकों से धन प्राप्त हुआ। 1993 में कथित तौर पर इस क्षेत्र में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) का गठन किया गया था। हाफ़िज़ सईद और हुर्रियत नेताओं ने कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में हिंसा और अशांति भड़काने के लिए अवैध धन का इस्तेमाल किया।

उनकी हरकतों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाना, स्कूलों को जलाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और राजनीतिक प्रतिरोध की आड़ में आतंकवाद को बढ़ावा देना शामिल था। एनआईए का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करना था। राजनीतिक प्रतिरोध के नाम पर हिंसक तरीकों से अशांति को बढ़ावा देकर, उन्होंने क्षेत्रीय शांति को कमजोर करने की कोशिश की।

एजेंसी की जांच से पता चलता है कि कैसे इन गतिविधियों को क्षेत्र में अराजकता पैदा करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। अदालत ने इस मामले से संबंधित सभी लंबित आवेदनों को जिला न्यायाधीश के पास भेज दिया है। इसमें इंजीनियर राशिद की नियमित जमानत याचिका भी शामिल है।

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