Emergency: कौन थीं जबरन पुरुषों की नसबंदी कराने वाली 'रूखसाना सुल्ताना'? इस फेमस अभिनेत्री से क्या है रिश्ता?
Who is Rukhsana Sultana: 25 जून की तारीख भारतीय लोकतंत्र में 'ब्लैक डे' के नाम से जानी जाती है क्योंकि इसी दिन साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में 'आपातकाल' का ऐलान किया था।
5 जून 1975 में लगी इमरजेंसी 21 मार्च 1977 यानी कि पूरे 21 महीने तक चली थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आपातकाल की 50वीं बरसी पर उस 'काले दिन' को याद करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है।

उन्होंने Twitter पर लिखा है कि 'आज का दिन उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया। #DarkDaysOfEmergency हमें याद दिलाता है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और भारत के संविधान को रौंद दिया, जिसका हर भारतीय बहुत सम्मान करता है।'
आक्रोश, विद्रोह, दहशत और तानाशाही का मंजर
इसी के साथ ही पीएम मोदी ने कांग्रेस को उनकी नीतियां याद दिलाईं और उन्होंने राहुल गांधी को घेरते हुए 'बैक टू बैक' 4 पोस्ट किए । मालूम हो कि इमरजेंसी के दौरान देश की जो स्थिति थी उसे याद करके लोगों के रोंगटे आज भी खड़े हो जाते हैं। देश उस वक्त आक्रोश, विद्रोह, दहशत और तानाशाही के दौर से गुजरा था , खुद साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'आपातकाल के दौरान देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था।'

नसबंदी प्रोग्राम ने बिगाड़ा खेल
इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने भी अपने 'नसबंदी प्रोग्राम' से लोगों के डर में दहशत पैदा कर दी थी और उस वक्त एक महिला ऐसी थी, जिसका नाम सुनते ही सड़क पर कर्फ्यू जैसा माहौल पैदा हो जाता था, उस महिला का नाम था 'रूखसाना सुल्ताना', जो खूबसूरती में तो अभिनेत्रियों को भी मात देती थी।
संजय गांधी की काफी करीबी थीं 'रूखसाना सुल्ताना'
'रूखसाना सुल्ताना' संजय गांधी के काफी करीबी थीं और कहा ये भी जाता था कि उन्हें संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी भी पसंद नहीं करती थीं। उनका पार्टी में भी काफी दबदबा था।
किताब '24 अकबर रोड' में राशिद किदवई ने किया है जिक्र
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रशीद किदवई ने अपनी किताब '24 अकबर रोड' में इमरजेंसी और 'रूखसाना सुल्ताना' दोनों के बारे में खुलकर लिखा है। उन्होंने अपनी किताब में साफ तौर पर अंकित किया है कि 'रूखसाना सुल्ताना' को देखते ही कांग्रेस के दफ्तर में कई नेता उन्हें नंबे डिग्री के एंगल से सलाम ठोंकते थे।
संजय गांधी ने नसबंदी कार्यक्रम चलाया था
मालूम हो कि देश की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए संजय गांधी ने नसबंदी कार्यक्रम चलाया था , उन्होंने रुखसाना सुल्ताना को दिल्ली के मुस्लिम इलाके जामा मस्जिद के लोगों की नसबंदी कराने की जिम्मेदारी दी थी।
1 साल में करीब 13000 लोगों की नसंबदी कराई!
उस वक्त 'रुखसाना सुल्ताना' पर लोगों की जबरदस्ती नसबंदी कराने का आरोप लगा था। किताब में किदवई ने लिखा है कि 'रुखसाना सुल्ताना ने जामा मस्जिद इलाके में 1 साल में करीब 13000 लोगों की नसंबदी कराई थी, जिसके लिए सरकार से उन्हें 84 हजार रुपए भी मिले थे। उन्हें देखते ही लोग डर के मारे कांपने लग जाते थे।'

अचानक ही सियासी गलियारों से गायब हो गईं 'रूखसाना सुल्ताना'
लेकिन जितनी तेजी से 'रूखसाना सुल्ताना' का नाम उस वक्त सुर्खियां बना था, उतने ही वेग से वो सियासी गलियारों और खबरों से गायब हो गईं और फिर वो सालों बाद दुनिया के सामने तब आईं जब उनकी बेटी अमृता सिंह ने फिल्म 'बेताब' के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म के प्रमोशन के दौरान वो मीडिया के सामने तो आईं लेकिन वो गांधी परिवार से दूर ही रहीं।
अमृता सिंह की मां हैं 'रूखसाना सुल्ताना'
आपको बता दें कि इमरजेंसी के बाद वो गुमनामी के अंधेरों खो गई थीं, ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने सियासी दुनिया छोड़ दी और मशहूर लेखक खुशवंत सिंह के भतीजे और आर्मी ऑफिसर शविंदर सिंह से शादी करके घर बसा लिया था।
सियासी दुनिया में खौफ का पर्याय बनीं 'रूखसाना सुल्ताना'...
फिलहाल अमृता सिंह के अभिनेत्री बनने के बाद भी वो ना तो कभी किसी पब्लिक इवेंट में नजर आईं और ना ही कभी किसी सियासी फंक्शन में दिखाई दीं और इस तरह से कभी लोगों के बीच में खौफ का पर्याय बनीं 'रूखसाना सुल्ताना' की बाद की जिंदगी में क्या हुआ, ये केवल उनके घरवाले ही जानते हैं और किसी को उनके बारे में आज तक कुछ पता नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications