ECLGS 5.0: क्या है सरकार की नई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम? किसे मिलेगी मदद? पूरी डिटेल
Emergency Credit Line Guarantee Scheme: दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। सप्लाई चेन में बाधा और घटती मांग के कारण कई स्टार्टअप्स और स्थापित उद्योग नकदी (Cash Flow) के संकट से जूझ रहे हैं। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने व्यापार जगत को ऑक्सीजन देने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS 5.0) के नए चरण को हरी झंडी दे दी है।
18,100 करोड़ रुपये के आवंटित बजट वाली यह योजना मुख्य रूप से उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) और एविएशन सेक्टर को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो वैश्विक अस्थिरता की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इस स्कीम के जरिए बाजार में करीब 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना है।

100% गारंटी के साथ मिलेगा आसान लोन
सरकार ने कर्ज लेने की राह को बेहद सुगम बना दिया है। इस योजना के तहत MSME सेक्टर को दिए जाने वाले ऋण पर केंद्र सरकार 100% क्रेडिट गारंटी देगी। इसका सीधा मतलब है कि यदि कोई छोटा उद्यमी लोन चुकाने में असमर्थ होता है, तो उसका जोखिम सरकार उठाएगी। अन्य बड़ी कंपनियों और संकटग्रस्त एयरलाइंस के लिए यह गारंटी 90% तय की गई है। यह पूरी प्रक्रिया नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) के माध्यम से संचालित होगी, जिससे बैंक बिना किसी हिचकिचाहट के लोन वितरित कर सकेंगे।
ECLGS 5.0: कौन होगा पात्र और कितनी मिलेगी मदद?
ECLGS 5.0 का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं:
पात्रता: यह सुविधा उन MSME, गैर-MSME और एयरलाइंस को मिलेगी जिनका लोन अकाउंट 31 मार्च 2026 तक 'स्टैंडर्ड' (नियमित) रहा है।
कर्ज की सीमा: कंपनियां पिछले वित्त वर्ष (FY26) की आखिरी तिमाही के वर्किंग कैपिटल का 20% तक अतिरिक्त लोन ले सकेंगी।
अधिकतम राशि: सामान्य कंपनियों के लिए यह सीमा 100 करोड़ रुपये है, जबकि एयरलाइंस के लिए इसे बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किया गया है।
भुगतान के लिए मिलेगा लंबा समय
कारोबारियों पर तुरंत किस्त का बोझ न पड़े, इसके लिए उदार शर्तें रखी गई हैं। MSME और अन्य सेक्टर्स को लोन चुकाने के लिए 5 साल का वक्त मिलेगा, जिसमें पहले 1 साल तक मूलधन की किस्त नहीं देनी होगी। वहीं, एविएशन सेक्टर के लिए 7 साल की अवधि तय की गई है, जिसमें शुरुआती 2 साल की छूट (मोराटोरियम) शामिल है। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए उद्यमियों से कोई अतिरिक्त गारंटी फीस नहीं ली जाएगी।
इन सेक्टर्स को मिलेगी नई संजीवनी
यह स्कीम केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सर्विस, ट्रेडिंग और एविएशन इंडस्ट्री को भी प्राथमिकता दी गई है। विशेष रूप से 5,000 करोड़ रुपये का फंड एयरलाइंस के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि वे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आ रही बाधाओं के बीच अपनी सैलरी और ऑपरेशनल खर्चों को मैनेज कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल लाखों नौकरियों को सुरक्षित करेगा, बल्कि सप्लाई चेन को टूटने से बचाकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार को भी बनाए रखेगा। इससे पहले कोरोना काल में भी ECLGS ने लाखों छोटे उद्योगों को डूबने से बचाया था, और अब वर्जन 5.0 इसी विरासत को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
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