Elvish Yadav Case: सांप का जहर जानलेवा... फिर भी क्यों होता है इस्तेमाल? भारत में क्यों बढ़ रहा इसका चलन?

चर्चित यूट्यूबर एल्विश यादव को नोएडा पुलिस ने जहरीले सांपों की तस्करी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। नोएडा पुलिस ने इस मामले में उनको पूछताछ के लिए बुलाया था।

एल्विश के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके सूरजपुर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने एल्विश यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एल्विश को पुलिस ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल ले गई। इससे पहले एल्विश से लंबी पूछताछ की गई थी।

snake venom use

पिछले दिनों नोएडा में सांप के जहर सप्लाई करने वाले गिरोह के पर्दाफाश के दौरान एल्विश का नाम सामने आया था। एल्विश के खिलाफ नोएडा में केस दर्ज किया गया था। भाजपा सांसद मेनका गांधी की संस्था पीपल फॉर एनिमल के एनिमल वेलफेयर ऑफिसर गौरव गुप्ता ने इस मामले में शिकायत की थी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने 2 नवंबर 2023 नोएडा के सेक्टर 51 के सेवरोन बैंक्वेट हॉल में छापा मारा था और यहां से 5 लोग राहुल, टीटूनाथ, जयकरण, नारायण और रविनाथ को गिरफ्तार किया था।

इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को 9 सांप बरामद हुए थे, जिनमें 5 कोबरा, 1 अजगर, 2 दोमुंहा सांप और एक रेड स्नैक बरामद हुआ था। इसके अलावा पुलिस को 20 ML स्नेक वेनम बरामद हुआ था। ये जहर करैत और कोबरा का था।

इस मामले से जुड़ी पूछताछ के दौरान एल्विश का नाम सामने आया था। एल्विश पर सांप और जहर की सप्लाई करने का आरोप लगा था। हालांकि एल्विश ने कहा था कि वो इस पार्टी में नहीं था और उसका इससे कोई संबंध नहीं है। इसके बाद ही थाना सेक्टर- 49 में एल्विश यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। एल्विश से नोएडा पुलिस कई बार पूछताछ भी कर चुकी है।

अब एल्विश यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 284, 289, 120बी और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 की धारा 9, 39, 48, 49, 50, 51 के तहत केस दर्ज हुआ है। इस मामले में आरोपियों से बरामद स्नेक बेनम को जांच के लिए भेजा गया था। वहां से मिली रिपोर्ट के बाद एनडीपीएस एक्ट की धाराएं बढ़ा दी गई है।

स्नेक वेनम क्या है?

स्नेम वेनम का अर्थ सांप का जहर या लार है जिसमें ज़ूटॉक्सिन होते हैं जिसका उपयोग सांप अपने शिकार के लिए या भोजन को पचाने के लिए करते हैं। कई सांप शिकार के लिए अपने जहर को इंजेक्ट करते हैं या फिर थूक कर इसका इस्तेमाल करते हैं।

सांप के जहर को 'मनोरंजक दवा' के रूप में उपयोग करना भारत में असामान्य और अत्यधिक खतरनाक प्रथा है, जिसमें शख्स की जान जाने का खतरा किसी भी अन्य नशे की तुलना में सबसे अधिक होता है।

2018 में सांप-बिच्छू के जहर का नशे के रूप में इस्तेमाल से जुड़ी एक स्टडी की गई थी इसके मुताबिक नशे के रूप में सांप के जहर का इस्तेमाल करना कम प्रचलित और बेहद खतरनाक तरीका है। हालांकि इस रिपोर्ट में जिन मामलों का उल्लेख किया गया है उनमें से किसी भी केस में पीड़ित की मौत सांप काटने से नहीं हुई है।

रिपोर्ट में सांप के जहर का इस्तेमाल वहीं लोग कर रहे थे जो कि अन्य सभी प्रकार के नशे के आदी थे और उन पर रसायनों का बहुत असर नहीं हो रहा था। वे मॉर्फीन और कोकीन जैसी चीजों से ऊब गए थे। शुरुआत में हाथ की छोटी उंगली या पैर के अंगूठे में डसवाते हैं। उसके बाद होंठ, जुबान में भी डसवाना शुरू करते हैं।

इस दौरान सांप को बोतल में बंद रखा जाता है और उसके मुहाने पर उंगली या जीभ रखकर डसवाया जाता है। सांप के डसने के बाद 10 से 40 सेकेंड तक तेज चुभन होती है। उसके बाद बेहद सुख की अनुभूति, मसल्स में दर्द और नींद आने लगती है।

सांप के जहर का नशा उसकी मात्रा पर निर्भर करता है। कभी-कभी ये पूरे दिन तो कभी पूरे सप्ताह तक रहता है। इस दौरान व्यक्ति को किसी और नशे की तलब नहीं लगती है।

भारत में नशेड़ी नशे में जिस सांप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उसका नाम नाजा नाजा यानी कोबरा, बुंगारस कैर्यूलस यानी कॉमन क्रेट और ओफियोड्रिस वर्नालिस यानी हरा सांप है। इन सांपों में न्यूरोटॉक्सिक जहर पाया जाता है। यह जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, पक्षाघात और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।

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