Gujarat Election result 2017 : भाजपा ने लगाया जीत का छक्का लेकिन 'बाजीगर' बने राहुल गांधी
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नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के अब तक के नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि राज्य में एक बार फिर से कमल खिलने जा रहा है, लोगों का अपने पीएम मोदी के प्रति भरोसा कायम है लेकिन इस बार इस भरोसे में थोड़ी नाराजगी छुपी हुई है क्योंकि जो रूझान दिख रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि बीजेपी का जनादेश पिछले चुनावों के मुकाबले राज्य में घटा है तो वहीं दूसरी ओर गुजरात के संग्राम में जिस तरह से कांग्रेस ने अपना रण-कौशल दिखाया है, उसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। चुनाव परिणाम साबित करते हैं कि मोदी के गृह राज्य में भी लोगों को राहुल गांधी अच्छे लगने लगे हैं और उन्हें लगता है कि भले ही कांग्रेस जैसी भी हो, राहुल पर एक बार भरोसा किया जा सकता है, जो कि हाशिए पर सिमटी कांग्रेस के लिए एक सुखद खबर जरूर हो सकती है कि इसलिए टीवी चैनलों की बहस में राहुल गांधी के लिए 'बाजीगर' शब्द का प्रयोग हो रहा है यानी कि वो हार कर भी मैच जीत गए हैं।

क्या होगा असर?
इसमें कोई शक नहीं कि गुजरात चुनावों का असर साल 2019 के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा, इसलिए इसे गुजरात विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल मैच कहा जा रहा था, जब संग्राम शुरू हुआ था तब कांग्रेस लड़ाई में ही नहीं थी लेकिन जिस तरह से उसने यहां का युद्द लड़ा उसने बीजेपी के नाक में दम कर दिया और शायद इसी वजह से विकास के नाम पर चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पीएम मोदी को साबरमती में सी-प्लेन उतारना पड़ा क्योंकि राहुल ने उसने चीख-चीख कर पूछा था-कहां है विकास?

भाजपा के तीन फैक्टर
गुजरात बीजेपी के लिए जीतना बहुत जरूरी था, पहला ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,का गृह राज्य है, दूसरा ये गुजरात के विकास मॉडल के ही दम पर पीएम मोदी ने पूरे देश का दिल जीता था और भारत को विकास के पथ पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं तीसरा फैक्टर ये है पिछले दो दशकों से भाजपा का यहां गढ़ रहा है, ऐसे में राहुल गांधी के प्रति जनता का मोह, बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है।

दावों की खुली पोल
नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 155 से अधिक सीट मिलने का दावा किया था, साल 2012 में बीजेपी के पास भी 115 सीटें थी जबकि कांग्रेस के पास केवल 61 सीट थी, इसलिए इस बार भाजपा जीत तो गई है लेकिन इस जीत में मजा नहीं है।

सीटों का नुकसान होता दिख रहा
चुनाव परिणाम की तस्वीर से यह बात स्पष्ट होती दिख रही है। बीजेपी ने अपना गढ़ भले ही बचा लिया हो लेकिन दावा के अनुसार उसे लाभ नहीं मिला, बल्कि सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।

राहुल गांधी बने बाजीगर
दूसरी तरफ राहुल गांधी के मत्था टेकने या जनेऊ पहनने का असर राज्य की जनता पर हुआ और इसलिए कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा है, जिसने कांग्रेस को फिर से ताकत में ला दिया है, गौरतलब है कि साल 2012 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को गुजरात से एक भी सीट नहीं मिली थी।जिससे साफ हो गया है कि कांग्रेस की छवि भले ही ना बदली हो लेकिन राहुल के प्रति लोगों का रवैया नरम हुआ है।












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