'हमारे लिए कोई पक्ष-विपक्ष नहीं, वोट चोरी शब्द संविधान का अपमान', चुनाव आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 10 बातें

Election Commission Press conference Highlights: चुनाव आयोग ने नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा -"हमारे लिए न कोई पक्ष है और न विपक्ष, सभी राजनीतिक दल हमारे लिए बराबर हैं।" उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का लक्ष्य हर पात्र मतदाता को वोटर लिस्ट में लाना और हर अपात्र मतदाता को वोटर लिस्ट से बाहर करना है।

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पिछले 20 साल से मतदाता सूची में सुधार की मांग हो रही थी, जिसके बाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत बिहार से की गई है। इस प्रक्रिया में बीएलओ (BLO) और राजनीतिक दलों के नामित बीएलए (BLA) ने मिलकर प्रारूप सूची तैयार की है। सभी दलों के बीएलए ने इस पर साइन करके सत्यापित भी किया है। उन्होंने कहा कि त्रुटि हटाने के लिए राजनीतिक दलों और मतदाताओं का योगदान जरूरी है।

Election Commission Press conference Highlights

गौरतलब है कि 7 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि "देशभर में वोट चोरी हो रहे हैं, हमारे पास सबूत है कि चुनाव आयोग भी इसमें शामिल है और ये सब भाजपा के लिए किया जा रहा है।"

चुनाव आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें

🔴 1. 'चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेगा'

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा,

''चुनाव आयोग मतदाताओं को एक संदेश देना चाहता है। भारतीय संविधान के अनुसार, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले व्यक्ति को मतदाता होना चाहिए। आप जानते हैं कि कानून के अनुसार, हर राजनीतिक दल का चुनाव आयोग में पंजीकरण होता है, फिर चुनाव आयोग भेदभाव कैसे कर सकता है, चुनाव आयोग के लिए सत्ताधारी दल और विपक्षी दल समान हैं। हमारे लिए कोई पक्ष-विपक्ष नहीं है, चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेगा।"

🔴 2. CEC ज्ञानेश कुमार का बड़ा बयान - पारदर्शी प्रक्रिया में वोट चोरी असंभव

CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से संपन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में 1 करोड़ से अधिक कर्मचारी, 10 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट और लगभग 20 लाख पोलिंग एजेंट उम्मीदवारों की ओर से तैनात रहते हैं।

CEC ज्ञानेश कुमा ने सवाल उठाया - "इतने बड़े पैमाने पर निगरानी के बीच क्या कोई मतदाता वोट चोरी कर सकता है? इतनी पारदर्शिता में यह बिल्कुल संभव नहीं है।"

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाताओं की ड्राफ्ट और फाइनल सूची नियमित रूप से सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाती है। यदि इसके बाद भी कोई त्रुटि पाई जाती है तो पहले जिला पदाधिकारी (DM) के पास अपील की जा सकती है, और जरूरत पड़ने पर मामला राज्य निर्वाचन आयोग तक ले जाया जाता है।

उन्होंने बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद चुनाव होते हैं, जिसमें प्रत्येक प्रत्याशी को केंद्रवार मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाती है। मतदान के समय पोलिंग एजेंट की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया होती है, और यदि कोई आपत्ति उठानी हो तो वह एजेंट उसी समय कर सकता है।

CEC ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था विकेंद्रीकृत और पारदर्शी है, इसलिए किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती।

🔴 3. CEC बोले - मतदाताओं की फोटो बिना इजाजत मीडिया में दिखाई गईं, यह गलत है

CEC ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा -

"हाल ही में हमने देखा कि कई मतदाताओं की तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना मीडिया में दिखाई गईं। उन पर आरोप लगाए गए और उनका दुरुपयोग किया गया।"

उन्होंने सवाल उठाया कि -

"क्या चुनाव आयोग किसी भी मतदाता का सीसीटीवी फुटेज या निजी तस्वीरें सार्वजनिक कर सकता है? चाहे वह किसी की मां हों, बहू हों या बेटी -यह पूरी तरह गलत है।"

CEC ने साफ किया कि जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, वही लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने प्रतिनिधि का चुनाव करने के हकदार हैं।

🔴4. CEC ज्ञानेश कुमार बोले - SIR में गड़बड़ियां दूर करने के लिए 15 दिन का समय बाकी

CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत गड़बड़ियों को सुधारने के लिए अभी भी 15 दिनों का समय है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और उनके नामित बीएलए (Booth Level Agent) से अपील की कि आने वाले दिनों में अगर मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी मिले तो उसका फॉर्म भरकर सुधार कराएं।

CEC ज्ञानेश कुमार ने साफ किया -

''ईसी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। जमीनी स्तर पर बीएलओ, बीएलए और मतदाता मिलकर काम कर रहे हैं। लेकिन यह चिंता का विषय है कि राजनीतिक दलों के बीएलए द्वारा सत्यापित की गई जानकारी उनके हाईकमान तक नहीं पहुंच रही, या फिर जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।''

🔴 5. CEC ज्ञानेश कुमार बोले - वोटर लिस्ट सुधार में सभी राजनीतिक दल और मतदाता दे रहे योगदान

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पिछले 20 सालों से मतदाता सूची में सुधार की मांग की जा रही थी, जिसके बाद बिहार से SIR प्रक्रिया की शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि इस दौरान बीएलओ और राजनीतिक दलों के बीएलए मिलकर प्रारूप सूची तैयार कर रहे हैं, जिसे सभी बीएलए के हस्ताक्षर से सत्यापित भी किया गया है।

CEC ने कहा कि त्रुटि हटाने की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दल और आम मतदाता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन मतदाताओं की आयु 1 जुलाई या 1 अक्टूबर तक 18 साल पूरी हो रही है, ऐसे करीब 1 लाख नए मतदाताओं ने आवेदन किया है।

🔴 6. CEC ज्ञानेश कुमार बोले- वोटर लिस्ट की कथित गलतियां पहले क्यों नहीं दिखीं?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट की कथित गलतियां पहले क्यों नहीं दिखीं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है, लेकिन यह केवल 800 लोगों का संगठन नहीं है, बल्कि लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत इसमें हजारों अधिकारी और राजनीतिक दलों की भागीदारी होती है।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतगणना के बाद भी 45 दिनों तक किसी को आपत्ति हो तो वह अदालत में अपील कर सकता है। ऐसे में जब पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई और तब किसी भी दल को गलती नजर नहीं आई, तो अब आरोप लगाने के पीछे क्या मकसद है, यह जनता अच्छी तरह समझती है।

🔴 7. ज्ञानेश कुमार बोले- केवल भारतीय नागरिक ही चुनाव में वोट डाल सकते हैं

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया कि भारत के संविधान के मुताबिक केवल भारतीय नागरिक ही सांसद और विधायक के चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं। विदेशी नागरिकों को यह अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी गैर-भारतीय ने गलती से गणना फॉर्म भर दिया है, तो SIR प्रक्रिया के दौरान उन्हें जरूरी दस्तावेज जमा कर अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। जांच के बाद ऐसे नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।

🔴 8. ज्ञानेश कुमार बंगाल में SIR पर क्या बोले?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसका फैसला तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर करेंगे।

🔴 9. ज्ञानेश कुमार ने कहा- निर्वाचन क्षेत्र के वोटर नहीं तो गवाह के तौर पर शिकायत करने का विकल्प

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं है, तो कानून के तहत उसके पास सिर्फ एक विकल्प है। निर्वाचन पंजीकरण नियम 20(3)(B) के अनुसार, ऐसी स्थिति में शिकायत गवाह के रूप में दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिए शिकायतकर्ता को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के समक्ष शपथ लेनी होगी और यह शपथ उसी व्यक्ति के सामने दिलानी होगी, जिसके खिलाफ शिकायत की गई है।

🔴 10. CEC ज्ञानेश कुमार बोले- चुनाव आयोग की वेबसाइट पर वोटर लिस्ट

CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर वोटर लिस्ट है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में SIR की प्रक्रिया नहीं हुई थी, जबकि अब तक देशभर में 10 से अधिक बार SIR आयोजित किया जा चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाना है। विभिन्न राजनीतिक दलों से लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए ही इस बार SIR की शुरुआत की गई है।

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