हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा के सच्चे वारिस एकनाथ शिंदे! महाराष्ट्र CM का क्या है हिंदुत्व

Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र में एक चर्चा आम है कि असली शिवसैनिक कौन? इस पर अब विराम लगता दिख रहा है। शिवसेना नेता व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का सच्चा उत्तराधिकारी माना जा रहा है। मतों के लिए चापलूसी का विरोध, अनुच्छेद 370 हटाना, राम मंदिर का निर्माण, स्वतंत्रता सेनानी सावरकर के प्रति गहरा सम्मान, यह बालासाहेब की विचारधारा थी, उन्होंने इसे दृढ़ता से निभाया। देशभक्त मुस्लिमों को बाळासाहेब अपना मानते थे, लेकिन देशविरोधी गतिविधियों करने वालों से उन्हें चिढ़ थी। सीएम एकनाथ शिंदे भी इसी विचारों पर आगे बढ़ रहे हैं।

राम मंदिर का कट्टर समर्थन
2019 में सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया और कांग्रेस-राष्ट्रवादी के साथ गठबंधन किया। बालासाहेब की जिस विचारधारा पर शिवसेना की नींव रखी गई थी, उस विचारधारा को उद्धव को किनारे रखना पड़ा। और इसी कारण उन्हें कई समझौते करने पड़े। राम मंदिर का मुद्दा कांग्रेस के कारण कई वर्षों तक अदालत में अटका रहा।

Maharashra CM Eknath Shinde

हर मंच पर शिंदे ने की राम मंदिर निर्माण की प्रशंसा
मोदी सरकार ने पहल करके इस मुद्दे को अदालत से सुलझाया और राम मंदिर का निर्माण किया। लेकिन उद्धव ठाकरे ने एक शब्द से भी नए राम मंदिर का स्वागत नहीं किया। बल्कि मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों की आलोचना की। एकनाथ शिंदे हर मंच पर इस राम मंदिर की प्रशंसा करते हैं। वे कहते हैं कि हिंदू धर्मावलंबियों का पांच सौ साल का संघर्ष सफल हुआ है। लेकिन उद्धव ठाकरे कभी भी ऐसी भूमिका नहीं ले सके।

सावरकर का सम्मान
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर ने देश के लिए अपने पूरे परिवार की आहुति दे दी। उनके परिवार की पूरी स्थिति खराब हो गई थी। स्वातंत्र्यवीर सावरकर की विचारधारा पर कांग्रेस हमेशा आलोचना करती आई है। कांग्रेस के नेता लगातार स्वातंत्र्यवीर सावरकर का अपमान करते रहते हैं, जिसमें राहुल गांधी सबसे आगे हैं। राहुल गांधी के स्वातंत्र्यवीर सावरकर विरोधी बयानों का एकनाथ शिंदे ने हमेशा विरोध किया है। लेकिन भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब राहुल गांधी महाराष्ट्र आए, तो उनके स्वागत के लिए खुद आदित्य ठाकरे नांदेड़ तक गए थे। वहीं, स्वातंत्र्यवीर सावरकर के अपमान के विरोध में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने "मैं सावरकर" अभियान चलाया और सावरकर सम्मान रैली निकाली।

बालासाहेबों के विचारधारा के वारिस
अनुच्छेद 370 हटाने की मांग बाळासाहेब ठाकरे लगातार सार्वजनिक मंच पर करते थे। केंद्र की मोदी सरकार ने चतुराई से अनुच्छेद 370 हटा दिया और कश्मीर को पूरी तरह से भारत में विलीन कर लिया। इसका सराहना करना उद्धव ठाकरे के लिए कभी संभव नहीं हुआ। एकनाथ शिंदे ने अनुच्छेद 370 हटाने वाली विचारधारा की गठबंधन करके यह सिद्ध किया है कि वे ही बाळासाहेब की विरासत आगे ले जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के लिए उद्धव ठाकरे के गुट द्वारा निकाली गई प्रचार रैली में मुंबई बम विस्फोट मामले के आरोपी का सहभाग था। यह बात विशेष रूप से चौंकाने वाली है।

महाराष्ट्र से कोई भी प्रतिनिधि चुना जाता है तो वह कम से कम महाराष्ट्र का होना चाहिए, ऐसी अपेक्षा होती है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने इमरान प्रतापगड़ी, जो उत्तर प्रदेश के कवि हैं, को महाराष्ट्र से मौका दिया और इसका विरोध करने का साहस भी उद्धव ठाकरे और उनके नियंत्रण वाली शिवसेना नहीं दिखा सकी।

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