हेमंतकुमार शाह का खुलासा - नरेंद्र मोदी के खिलाफ आर्टिकल लिखने पर आया संपादक का फोन
नई दिल्ली: हेमंतकुमार शाह ने खुलासा किया है उन्हें नरेंद्र मोदी के खिलाफ आर्टिकल लिखने पर उन्हें संपादक का फोन आ गया था। 60 साल के हेमंतकुमार एक दशक पहले तक राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ(आरएसएस) के स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े थे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कार्यकारी सदस्य थे। हेमंतकुमार शाह ने एचके आर्ट्स कॉलेज अहमदाबाद के प्रिसिंपल के प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन द्वारा सभागार में गु कॉलेज प्रबंधन द्वारा एक समारोह के लिए अपने सभागार का उपयोग करने की अनुमति नहीं देने के विरोध में ये इस्तीफा दिया। इस कार्यक्रम में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गाया था।

'मैं कभी आरएसएस का प्रिय था'
शाह ने पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। वो जयप्रकाश नारायण की छात्रालय संघर्ष वाहिनी से छात्र के तौर पर जुड़े थे। उन्होंने पत्रकार के तौर पर भी काम किया। शाह को पत्रकारिता में करीब 14 साल का अनुभव है। इस दौरान वो टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ भी जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें 2008 में एसजेएम मीटिंग में भाग लेने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि मैं उनका कोर मेंबर था। आरएसएस के लोग मुझे तब तक पसंद करते थे जब तक मैं उदारवाद, ग्लोबलाइजेशन और निजीकरण के खिलाफ था।

नरेंद्र मोदी के खिलाफ लिखने पर आया संपादक का फोन
अपने रुख को बदलने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, 'आरएसएस संस्था पूर्वाग्रही था और वह केवल यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी नीतियों की आलोचना करती थी, लेकिन वो वसुंधरा राजे सिंधिया, नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलती थी। मेरी सोच से इन लोगों के लिए तब समस्या में बदल गई जब मैंने 2002-03 में नरेंद्र मोदी की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की।' शाह ने कहा कि साल 2001 में मैंने एक स्थानीय अखबार में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार की 'समरस योजना' की आलोचना करते हुए एक आर्टिकल लिखा था आर्टिकल अखबार में प्रकाशित होने के बाद मुझे संपादक का फोन आया और मुझसे उन्होंने मोदी के खिलाफ लेख नहीं लिखने को कहा। उनके करीबी दोस्तों का कहना है कि 2002 के गुजरात दंगे एकेडमिक के लिए "टर्निंग प्वाइंट"साबित हुए। शाह के एक सहयोगी कहते हैं कि एक शुद्ध गांधीवादी होने के नाते, 2002 के दंगों से निपटने के तरीके से वह बहुत आहत थे।

शाह मोदी सरकार के आलोचक
शाह ने गुजरात में नरेंद्र मोदी के सीएम रहते हुए उनके विकास मॉडल की काफी आलोचना की थी। उनकी किताब 'सच्चाई गुजरात की' साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हुई थी और खूब बिकी थी। शाह गुजरात विद्यापीठ के वाइस चांसलर के लिए तीन नामांकित सदस्यों
में थे लेकिन प्रोफेसर अनामिक शाह को चुना गया। एचके आर्ट्स कॉलेज में उनके प्र्भारी प्रिसिंपल चुने जाने पर कई लोगो को आश्चर्य हुआ था लेकिन शाह का कहना था कि उन्हें जिम्मेदारी इसलिए मिली क्योकिं कॉलेज के ट्रस्टी न्यूट्रल थे।
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