ECI PC: बिहार SIR के बाद चुनाव आयोग की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, 'वोट चोरी' के आरोपों का दिया जवाब
ECI Press Conference: नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में आज चुनाव आयोग (ECI) की प्रेस कॉन्फ्रेंस की रही है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए खास है क्योंकि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की शुरुआत के बाद आयोग पहली बार मीडिया के सामने अपनी बात रख रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस प्रेस ब्रीफिंग को लेकर उत्सुकता इसलिए भी बढ़ हुई है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में "वोट चोरी" जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में आयोग न सिर्फ वोटर लिस्ट प्रक्रिया पर जानकारी दे रहा है, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त का संबोधन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की नजर में सभी बराबर हैं। उन्होंने साफ कहा कि आयोग अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटेगा।
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चुनाव आयुक्त और अधिकारी भी मौजूद
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीईसी ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ चुनाव आयुक्त और आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी मिलकर मीडिया को चुनाव संबंधी अपडेट और हालिया घटनाओं पर जानकारी दे रहे हैं।
चुनाव आयोग के प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए ज़ोर देकर कहा कि संविधान 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना और अपने मताधिकार का प्रयोग करना अनिवार्य बनाता है।
- पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि चूंकि सभी राजनीतिक दल चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं, इसलिए भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता।
- उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आयोग के लिए सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच कोई भेद नहीं है, सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है, और ज़ोर देकर कहा कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटेगा।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि ज़मीनी स्तर पर सभी मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ स्तर के अधिकारी पारदर्शी तरीके से मिलकर काम कर रहे हैं। वे दस्तावेज़ों की जांच कर रहे हैं, हस्ताक्षर कर रहे हैं और वीडियो गवाही भी दे रहे हैं।
- उन्होंने चिंता जताई कि राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों और उनके द्वारा नामित बीएलओ की ये सत्यापित गवाहियां और दस्तावेज़ या तो उनके राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक नहीं पहुंच रहे हैं, या फिर ज़मीनी सच्चाई को नज़रअंदाज़ कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
- ज्ञानेश कुमार ने कहा कि सच्चाई यह है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर सभी लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं। जब सात करोड़ से अधिक बिहार के मतदाता चुनाव आयोग के साथ खड़े हैं, तो न तो आयोग की विश्वसनीयता पर और न ही मतदाताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा सकता है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जानकारी दी कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के तहत 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने मतदाता सूची का प्रारूप तैयार किया है। जब यह ड्राफ्ट सूची हर बूथ पर बनाई जा रही थी, तब सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स ने इसे अपने हस्ताक्षर के साथ सत्यापित किया। इस दौरान मतदाताओं की ओर से कुल 28,370 दावे और आपत्तियां भी दर्ज कराई गई हैं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ दिन पहले कई मतदाताओं की तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना मीडिया में दिखाई गईं और उन पर आरोप लगाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग किसी मतदाता, उसकी मां, बहू या बेटी का सीसीटीवी वीडियो सार्वजनिक कर सकता है? उन्होंने साफ कहा कि वोट केवल वही लोग डालते हैं जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होते हैं और वे अपने उम्मीदवार का चुनाव करने का अधिकार रखते हैं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया में एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी, दस लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट और बीस लाख से अधिक प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट मिलकर काम करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और पारदर्शी व्यवस्था के बीच क्या कोई मतदाता वोट चुरा सकता है? उन्होंने कहा कि इतनी खुली और व्यवस्थित प्रक्रिया में चोरी जैसी बात संभव ही नहीं है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ मतदाताओं ने डबल वोटिंग के आरोप लगाए, लेकिन जब सबूत मांगे गए तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने साफ कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही कोई मतदाता ऐसे झूठे आरोपों से डरता है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति करने के लिए भारत के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है और इसमें चुनाव आयोग का नाम इस्तेमाल किया जा रहा है।
- ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग हमेशा गरीब, अमीर, बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और हर धर्म व वर्ग के मतदाताओं के साथ बिना किसी भेदभाव के मजबूती से खड़ा था, खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि जब रिटर्निंग अफसर चुनाव नतीजे घोषित करता है, तो कानून में यह प्रावधान है कि 45 दिन के भीतर कोई भी राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकता है और नतीजों को चुनौती दे सकता है। लेकिन इस अवधि के बाद, चाहे केरल हो, कर्नाटक या बिहार, बिना आधार के आरोप लगाना उचित नहीं है।
- उन्होंने कहा कि जब चुनाव खत्म होने के 45 दिन के भीतर किसी उम्मीदवार या दल को कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती और बाद में अचानक आरोप लगाए जाते हैं, तो देश के मतदाता और लोग खुद समझ जाते हैं कि ऐसे आरोपों के पीछे असल मकसद क्या है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि जहां तक मशीन से पढ़ी जाने वाली वोटर लिस्ट का सवाल है, इस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2019 में कह चुका है कि ऐसा करना मतदाता की निजता का उल्लंघन हो सकता है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान के अनुसार केवल भारतीय नागरिक ही सांसद या विधायक का चुनाव लड़ सकते हैं। दूसरे देशों के लोगों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। अगर ऐसे लोगों ने नामांकन फॉर्म भर दिए हैं, तो बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान उन्हें दस्तावेज़ों के जरिए अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। जांच के बाद अगर वे भारतीय नागरिक नहीं पाए जाते, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल या अन्य राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कब कराया जाएगा, इस पर फैसला तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर लेंगे।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी विधानसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं है, तो कानून में उसके पास सिर्फ एक ही विकल्प है। रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्ट्रर्स रूल्स के नियम 20 की उपधारा (3)(b) के तहत वह गवाह के रूप में शिकायत दर्ज करा सकता है। इस स्थिति में उसे चुनाव पंजीकरण अधिकारी के सामने शपथ लेनी होगी और यह शपथ उसी व्यक्ति की मौजूदगी में दिलाई जाएगी, जिसके खिलाफ शिकायत की गई है।
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