ओपिनियन पोल बैन मामले में अकेले पड़ी भाजपा

हलांकि अभी तक ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अपनी राय व्यक्त नहीं की है। चुनाव आयोग ने ओपिनियन पोल पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय की जानकारी कानून मंत्रालय को दी है। चुनाव आयोग से मिली जानकारी के बाद कानून मंत्रालय जल्द ही इस पर फैसला लेगी। अब तक चुनाव आयोग के पास इस से संबंधित 5 राष्ट्रीय और 10 राज्य स्तर की पार्टियों के सुझाव मिल चुके है।
चुनाव आयोग के मुताबिक सभी राजनीतिक दलों की राय के बाद ही जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 में संशोधन किया जाएगा। ताकि चुनाव की अधिसूचना जारी होने की तारीख से चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर प्रतिबंध लगाया जा सके। वहीं चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर भाजपा अकेली पड़ गई है। वो नहीं चाहती कि ओपिनियन पोल पर बैन लगे। भाजपा ने कानून मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि अगर ओपिनियन पोल पर बैन लगता है तो ये संविधान के अनुच्छेद 19(1ए) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी का हनन होगा।












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