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बदल रही चाइना बॉर्डर की तस्वीर, 'ड्रैगन' की छाती तक पहुंच रहा भारत, जानें क्या है ICBR प्रोजेक्ट?

पूर्वी लद्दाख में भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत करने वाले इंडिया चाइना बॉर्डर रोड (ICBR) प्रोज्क्ट के तीसरे चरण का काम शुरू हो गया है।

सीमा सड़क संगठन (BRO), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) और नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर सामरिक रूप महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट की मदद से पूर्वी लद्दाख में सड़क नेटवर्क में चार चांद लगना तय है।

ladakh bro

क्या है ICBR प्रोजेक्ट?
आईसीबीआर प्रोजेक्ट के तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक सुरक्षा बलों, उनके उपकरणों, हथियारों और अन्य सामग्रियां तेजी से पहुंचाने के लिए हर मौसम में सक्षम दमदार सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

आईसीबीआर (ICBR) प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण में 73 सड़कों की पहचान सामरिक आवश्यकता के तहत की गई थी और इनमें से 61 के निर्माण की जिम्मेदारी बीआरओ को दी गई थी। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि तीसरे चरण में पूर्वी लद्दाख में 5 नई सड़कों की पहचान की गई है, जिसका निर्माण बीआरओ और सीपीडब्ल्यूडी करेगी।

पीएम मोदी ने शिंकू ला सुरंग का किया शिलान्यास
पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिंकू ला सुरंग का पहला शिलान्यास किया था। यह सुरंग मनाली से लेह तक सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। 4.1 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के बनते ही सुरक्षा बलों और उनके युद्धक उपकरणों की आवाजाही आसान और तेज हो जाएगी।

ICBR प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काम लगभग पूरा
इंडिया चाइना बॉर्डर रोड (ICBR) प्रोज्क्ट के तहत चीन से लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक सुरक्षा बलों की तेजी से आवाजाही के लिए सभी मौसम में काम करने वाले सड़कों के निर्माण के दूसरे चरण का काम लगभग पूरा हो चुका है। अलबत्ता कुछ महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण पर अभी भी कार्य प्रगति पर है।

गलवान की घटना के बाद और तेज हुआ सड़कों का निर्माण
भारत और चीन के बीच लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है। 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ झड़प के बाद केंद्र सरकार ने उस इलाके में सड़कों के निर्माण का काम तेज कर दिया था और आसीबीआर के तीसरे चरण के तहत इसके लिए नई सड़कों की पहचान की गई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-20 के बीच प्रति वर्ष सड़कों की 'फॉर्मेशन कटिंग' की रफ्तार 470 किलोमीटर की रही। इसमें मिट्टी का काम और सड़कों के खाका तैयार करने का काम शामिल है। 2017 से पहले यह रफ्तार इसकी आधी से भी कम या 230 किलोमीटर प्रति वर्ष ही थी, जो लंबे समय से चली आ रही थी।

इस बार के बजट में बीआरओ के आवंटन में 30% की बढ़ोतरी
इन परियोजनाओं के तहत कई मामलों में सिंगल या डबल लेन रोड को चार-लेन वाली सड़कों में भी परिवर्तित किया गया है। हाल ही में पेश 2024-25 के केंद्रीय बजट में बीआरओ के लिए 6,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो 2023-24 के मुकाबले 30% अधिक है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए दिए 1,050 करोड़ रुपए
इसके अतिरिक्त केंद्रीय गृह मंत्रालय को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चीन से सटे सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए 1,050 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

2,967 गांवों के व्यापक विकास पर चल रहा है काम
केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित इस कार्यक्रम के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के 19 जिलों के 46 ब्लॉक में आने वाले 2,967 गांवों की पहचान इनके व्यापक विकास को ध्यान में रखकर की गई है। पहले चरण में प्राथमिकता वाले कवरेज के लिए 662 गांवों की पहचान की गई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के 455 और लद्दाख के 35 गांवों को शामिल किया गया है।

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