Earthquake: दिल्ली से दरभंगा और श्रीनगर से पोर्ट ब्लेयर तक किस शहर को कितना खतरा, सरकार ने संसद में बताया
नई दिल्ली, 30 जुलाई: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में भूकंप से जोखिम वाले शहरों की पूरी लिस्ट रख दी है। इस लिस्ट में देश के कई बड़े शहर हाई सिस्मिक ऐक्टिविटी वाले जोने में हैं। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय विज्ञान और तकनीक और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने भूकंप को मॉनिटर करने के लिए अपने मंत्रालय की ओर से उठाए गए उपायों की भी जानकारी दी है। इस लिस्ट में मुख्य रूप से सिस्मिक जोन के जोन 5 और जोन 4 का जिक्र किया जा रहा है, जिन्हें भूकंप के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। राजधानी दिल्ली जोन 4 में है। सबसे बड़ी बात ये है कि भारत के 59 फीसदी इलाके भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने गए हैं, जिनमें अलग-अलग तीव्रता के भूकंप आने की संभावना बनी रहती है।

देश के 59 फीसदी इलाके भूकंप संभावित क्षेत्र
केंद्रीय विज्ञान और तकनीक और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया है कि देश के 11 फीसदी इलाके सिस्मिक मैप में जोन 5 के तहत आते हैं, जो कि सबसे ऐक्टिव जोन में हैं। जबकि 18 फीसदी इलाके जोन 4 में हैं। यही नहीं सरकार ने संसद को बताया है कि सभी राज्यों को मिलाकर देश के 59 फीसदी इलाके अलग-अलग तीव्रता वाले भूकंप के दायरे में हैं। सरकार ने भूकंप संभावित क्षेत्रों का जो ब्योरा दिया है, उसमें सिस्मिक जोन के आधार पर शहरों की एक पूरी लिस्ट दी है, जिसके आधार पर विज्ञान और तकनीक और पृथ्वी विज्ञान विभाग ने उनपर निगरानी रखने के लिए कदम उठाए हैं। बता दें कि नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के पास देशभर में नेशनल सिस्मोलॉजिकल नेटवर्क है, जो पूरे देश में 115 ऑब्जर्वेटरीज के जरिए धरती के नीचे होने वाली गतिविधियों पर नजर रखता है और उसी के आधार पर केंद्रीय और राज्यों के आपदा नियंत्रण वाले विभागों की तैयारियां सुनिश्चित करवाता है।

जोन 5 (उच्च भूकंपीय गतिविधि) वाले शहर
भूकंप के खतरे के लिहाज से यह सबसे संवेदनशील जोन है, जिसमें भुज (गुजरात), दरभंगा (बिहार), गुवाहाटी (असम), इंफाल (मणिपुर), जोरहाट (असम), कोहिमा (नगालैंड), मंडी (हिमाचल प्रदेश), पोर्ट ब्लेयर (अंडमान और निकोबार), श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर), तेजपुर (असम) और सदिया (असम) शामिल हैं। ये सारे वैसे शहर हैं, जहां भूंकप का खतरा सबसे ज्यादा है, क्योंकि यहां धरती के नीचे भूकंपीय गतिविधि बहुत ज्यादा रहती है।

जोन 4 वाले शहर
जोन 5 के बाद भूकंप की गतिविधियों में जिन शहरों को शामिल किया गया है वो जोन 4 में हैं। इनमें अल्मोड़ा (उत्तराखंड), अंबाला (हरियाणा), अमृतसर (पंजाब), बहराइच (उत्तर प्रदेश), बरौनी (बिहार), बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश), चंडीगढ़, दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल), देहरादून (उत्तराखंड), देवरिया (उत्तर प्रदेश), दिल्ली, दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), गंगटोक (सिक्किम), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल), कूच बिहार (पश्चिम बंगाल), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), लुधियाना (पंजाब), मुंगेर (बिहार), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), नैनीताल (उत्तराखंड), पटना (बिहार), पीलीभीत (उत्तर प्रदेश), रुड़की (उत्तराखंड) और शिमला (हिमाचल प्रदेश) शामिल हैं।

देश को जोन 2 से 5 तक में किया गया है विभाजित
भारतीय मानक ब्यूरो ने जो भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र तैयार की है, उसमें धरती के अंदर की हलचल के आधार पर इसे 2 से 5 तक के जोन में विभाजित किया गया है। मसलन, इस मानचित्र में पश्चिम बंगाल 2,3 और 4 जोन में है। इसका ज्यादातर इलाका जोन 3 में है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी 2, 3 और 4 जोन के इलाके हैं। फरवरी में सरकार ने कहा था कि 2020 में 3 तीव्रता से ज्यादा वाले 965 भूकंप आए थे और उनमें से 13 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में रिकॉर्ड किए गए थे।(तस्वीरें- फाइल)












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