809 घंटे तक टेस्टिंग, इंजन का वाल्व टेढ़ा, रबर पार्ट्स पर असर! E20 पेट्रोल पर ARAI की रिपोर्ट में क्या खुलासे?

E20 Petrol Impact on Old Vehicles ARAI Report: देशभर में अप्रैल 2025 से E20 पेट्रोल पूरी तरह लागू होने के बाद अब पुराने वाहनों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि पहले के मुकाबले माइलेज कम मिल रहा है। वहीं कुछ लोग इंजन और फ्यूल सिस्टम पर लंबे समय में पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। इस बीच ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक रिपोर्ट चर्चा में है।

इस रिपोर्ट में E20 पेट्रोल को लागू करने की सिफारिश तो की गई, लेकिन साथ ही कुछ पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले रबर के पुर्जों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई। हालांकि वाहन बनाने वाली बड़ी कंपनियों का कहना है कि कई साल की टेस्टिंग और सर्विस रिकॉर्ड में E20 से किसी बड़े नुकसान के सबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में E20 को लेकर लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं।

E20 Petrol Impact on Old Vehicles ARAI Report

ARAI की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

जानकारी के मुताबिक ARAI की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सरकार और ऑटो कंपनियों ने इसे अहम आधार माना है। रिपोर्ट में कहा गया कि E10 पेट्रोल के लिए बने पुराने वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर समय के साथ रबर से बने कुछ हिस्से खराब हो सकते हैं। इन हिस्सों में फ्यूल होज, गैस्केट, सील और ओ-रिंग शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार लंबे समय में इन्हें बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

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कारों की टेस्टिंग में क्या मिला?

चार पहिया वाहनों के इंजन की मजबूती जांचने के दौरान एक BS-IV इंजन ने E20 पेट्रोल पर ठीक प्रदर्शन किया। वहीं एक BS-VI टर्बो इंजन में 265 घंटे की टेस्टिंग के बाद दिक्कतें सामने आईं। दो अलग-अलग कार कंपनियों की ओर से कराई गई जांच में भी अलग नतीजे मिले। एक कंपनी ने 400 घंटे तक इंजन चलाने के बाद कोई समस्या नहीं बताई और प्रदर्शन संतोषजनक बताया। दूसरी कंपनी ने कुल 809 घंटे की टेस्टिंग के बाद इंजन के एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मोमैकेनिकल फेलियर दर्ज किया। इसका मतलब है कि लगातार ज्यादा गर्मी और लंबे समय तक दबाव पड़ने से वाल्व टेढ़ा हो सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह टूट भी सकता है।

हालांकि रिपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि इस खराबी की वजह सिर्फ E20 पेट्रोल नहीं मानी जा सकती। वाहन टेस्टिंग से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि आमतौर पर इंजन की मजबूती जांचने के लिए करीब 2,000 घंटे तक परीक्षण किया जाता है।

दोपहिया वाहनों का प्रदर्शन बेहतर रहा

रिपोर्ट में बताया गया कि तीन दोपहिया कंपनियों की ओर से किए गए इंजन टेस्ट में किसी तरह की समस्या नहीं मिली। E20 पेट्रोल पर गाड़ियों का प्रदर्शन सामान्य रहा और कोई बड़ी तकनीकी परेशानी सामने नहीं आई। रिपोर्ट के मुताबिक E20 पेट्रोल से धातु वाले हिस्सों पर कोई खराब असर नहीं मिला। वाहनों से निकलने वाला धुआं भी तय मानकों के अंदर रहा। स्टार्ट होने, चलने और ड्राइविंग से जुड़े दूसरे मानकों में भी कोई बड़ी दिक्कत नहीं दिखी। हालांकि E10 की तुलना में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर ईंधन की खपत करीब 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ी। अलग-अलग मॉडल में यह असर अलग रहा।

अब पूरे देश में सिर्फ E20 पेट्रोल

भारत ने अप्रैल 2025 में तय समय से करीब पांच साल पहले ही पूरे देश में E20 पेट्रोल लागू कर दिया। अब सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है। सरकार अब इससे आगे की तैयारी भी कर रही है। 22 से 30 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट दी गई है। साथ ही E85 और E100 ईंधन को भी नियमों में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

पुराने वाहन मालिकों की क्यों बढ़ी चिंता?

देशभर में अब पेट्रोल पंपों पर बिना 20 प्रतिशत एथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल उपलब्ध नहीं है। यानी लोगों के पास E20 के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है। कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने की शिकायत की है। खासकर 2012 से पहले बने वाहनों के मालिक लंबे समय में इंजन की स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। अप्रैल 2023 से पहले बने कई वाहन भी चर्चा में हैं क्योंकि उन्हें शुरुआत में E20 के लिए प्रमाणित नहीं किया गया था।

किन हिस्सों पर सबसे ज्यादा असर का डर?

इंजीनियरों का कहना है कि एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में ज्यादा नमी खींचता है। इससे पुराने वाहनों में जंग लगने और कुछ सामान जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। फ्यूल सिस्टम में लगे रबर और प्लास्टिक के हिस्से जैसे होज, सील, गैस्केट और ओ-रिंग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों ने वाल्व, पिस्टन हेड और फ्यूल सिस्टम के दूसरे हिस्सों की लंबी उम्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सर्दियों में कोल्ड स्टार्ट को लेकर भी कुछ लोगों ने चिंता जताई, लेकिन वाहन कंपनियों ने इसे सही नहीं माना। विशेषज्ञों का कहना है कि नया वाहन और पुराना वाहन एक जैसे नहीं हैं। नए मॉडल में एथेनॉल के हिसाब से सामग्री और इंजन सेटिंग पहले से तैयार रहती है, जबकि पुराने मॉडल में लंबे समय में ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

ऑटो कंपनियों ने क्या कहा?

मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, हुंडई मोटर इंडिया, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो ने कहा है कि E20 पेट्रोल मौजूदा वाहनों के लिए सुरक्षित है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के विक्रम गुलाटी ने कहा कि E20 लागू करने से पहले पुराने वाहनों सहित कई स्तर पर टेस्टिंग की गई थी। उन्होंने कहा कि भारत की प्रमाणन प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय UNECE मानकों के अनुसार होती है।

मारुति सुजुकी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की। इनमें 1.5 करोड़ से ज्यादा ऐसे वाहन थे जो तीन साल से पुराने थे और शुरुआत में E20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। कंपनी के अनुसार सर्विस रिकॉर्ड में E20 की वजह से जंग लगने, असामान्य घिसावट या पुर्जों की उम्र कम होने जैसा कोई सबूत नहीं मिला। कंपनी का यह भी कहना है कि मौजूदा पेट्रोल वाहनों में किसी तरह की अलग फिटिंग कराने की जरूरत नहीं है। हीरो मोटोकॉर्प ने भी कहा कि उसके सर्विस रिकॉर्ड में E20 इस्तेमाल करने वाले दोपहिया वाहनों में पहले की तुलना में नुकसान के ज्यादा मामले सामने नहीं आए।

आखिर क्यों बढ़ा विवाद?

हालांकि E20 पहले भी कुछ जगह उपलब्ध था, लेकिन अप्रैल 2025 के बाद यह पूरे देश में लागू हुआ। इसके बाद माइलेज और लंबे समय के असर को लेकर शिकायतें ज्यादा सुनाई देने लगीं। तेजी से लागू हुई इस योजना ने भी बहस बढ़ा दी है। अगर 2030 तक का पुराना लक्ष्य कायम रहता तो E0 और E10 वाले कई पुराने वाहन अपनी सामान्य उम्र पूरी कर चुके होते। सरकार की ओर से E22, E25, E27 और E30 जैसे नए मानकों की तैयारी ने भी वाहन मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों को लगता है कि E20 के बाद भविष्य में इससे ज्यादा एथेनॉल वाला ईंधन भी अनिवार्य किया जा सकता है।

सरकार एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रही है?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में सरकार का मानना है कि ज्यादा एथेनॉल मिलाने से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और देश का खर्च भी घटेगा। सरकार का कहना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और एथेनॉल बनाने वाली कृषि फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को भी अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा। वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद इस नीति को और गति मिली। ब्राजील के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल का भी अक्सर उदाहरण दिया जाता है। हालांकि वहां लोगों को पेट्रोल और एथेनॉल में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है, जबकि भारत में फिलहाल बिना 20 प्रतिशत एथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल खरीदने का विकल्प उपलब्ध नहीं है।

अरविंद केजरीवाल ने PM के सामने रखी कौन सी मांग?

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हैं कि लोगों को विकल्प दिया जाए। उन्होंने मांग की कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 और E0 पेट्रोल भी अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध कराया जाएं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मैं हाथ जोड़कर मोदी जी से अपील करता हूं कि जनता की इस मांग को मान लें और लोगों को विकल्प दें। पेट्रोल पंपों पर E20, E10 और E0, सभी तरह के पेट्रोल अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि लोग अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुन सकें।"

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