केदारनाथ जाने के लिए भक्तों की भारी भीड़, सोनप्रयाग में ही रोक दिए गए श्रद्धालु
केदारनाथ जाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लग रही है। भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
सोनप्रयाग, 28 मई: केदारनाथ जाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लग रही है। भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भारी भीड़ को देखते हुए सोनप्रयाग में ही भक्तों को रोक दिया जा रहा है। पुलिस और आईटीबीपी ने भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए शनिवार सुबह 10 बजे से सोनप्रयाग में केदारनाथ धाम में भक्तों को रोक दिया है।
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रुद्रप्रयाग के अंचल अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि यात्रियों को अब 29 मई रविवार सुबह 4 बजे से केदारनाथ धाम भेजा जाएगा। केदारनाथ धाम पर अत्यधिक भीड़ होने की वजह से कोई समस्या न उत्पन्न हो, इसके लिए पुलिस ने भक्तों को सोनप्रयाग में ही रोक दिया है। आगे भीड़ कम होने पर भक्तों को सोनप्रयाग से भेजा जाएगा।
नहीं थम रहा मौत का आंकड़ा
बता दें कि चारधाम यात्रा में एक तरफ श्रद्धालुओं के पहुंचने का रिकॉर्ड बनता जा रहा है। वहीं मौत का भी आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। चारधाम यात्रा शुरू होने के 24 दिनों के भीतर 83 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन 7 तीर्थयात्रियों की मौत हुई। यात्रा के लिए अब तक 20 लाख से अधिक तीर्थयात्री पंजीकरण करा चुके हैं जबकि 10 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं।
केदारनाथ में 41 की मौत
कोविड में 2 साल तक बंद पड़ी रही यात्रा खुलते ही इस बार यात्रा में हुजूम उमड़ रहा है। चारों धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के अलावा हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए भी यात्री पहुंच रहे हैं। केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। अब तक केदारनाथ में 41, यमुनोत्री में 25, बद्रीनाथ में 13, गंगोत्री में 4 यात्रियों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलजा भट्ट ने जानकारी दी।
16 दिनों में 55 घोड़ा-खच्चरों की मौत
आंकड़ों के अनुसार चार धाम यात्रा की शुरुआत से अबतक महज 16 दिनों में 55 घोड़ा-खच्चरों की पेट में तेज दर्द उठने से मौत हो चुकी है, जबकि 4 घोड़ा-खच्चरों की गिरने से और एक की पत्थर की चपेट में आने से मौत हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक 1.25 हजार तीर्थयात्री घोड़े-खच्चरों से अपनी यात्रा कर चुके हैं, जबकि अन्य तीर्थयात्री हेलीकॉप्टर और पैदल चलकर धाम पहुंचे हैं।












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