Dr Manmohan Singh: 123 Agreement जिसके लिए अड़ गए मनमोहन सिंह,सरकार को भी दांव पर लगा दिया

Dr Manmohan Singh: 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में देश ने अमेरिका के साथ एक रणनीतिक साझेदारी का द्वार खोला था। इस की परिणति अमेरिका के साथ 2008 के ऐतिहासिक सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट के रूप में हुई जिसे न्यूक्लियर डील के नाम से भी जाना गया। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच आपसी साझेदारी के और भी कई द्वार खोले।

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Dr Manmohan Singh: 123 समझौते ने परमाणु मामलों में भारत के एकाकीपन को दूर किया

इस ऐतिहासिक समझौते ने परमाणु मामलों भारत के दशकों से चले आ रहे एकाकीपन को न केवल दूर किया,बल्कि इस मुद्दे पर इसकी वैश्विक स्थिति को बहुत ही ज्यादा बेहतर की और इसकी वजह से कई तरह के रणनीतिक समझौतों के लिए द्वार खुलने शुरू हो गए।

Dr Manmohan Singh: 2005 में मनमोहन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश की चर्चा के बाद हुई घोषणा

अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील की घोषणा जुलाई 2005 में वॉशिंगटन में मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच बातचीत के बाद की गई थी। इससे भारत-अमेरिका के संबंधों का नया रास्ता खुलने वाला था। खासकर टेक्नोलॉजी और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बुलंदियां मिलने वाली थी।

Dr Manmohan Singh: इस डील से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर निकला भारत

19 जुलाई, 2005 को अमेरिकी कांग्रेस में मनमोहन सिंह ने एक बहुत ही प्रभावशाली भाषण दिया। इसमें उन्होंने परमाणु अप्रसार में भारत के बेदाग रिकॉर्ड को सामने रखा। एक परमाणु शक्ति के रूप में भारत के उत्तरदायित्व और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों को कभी भी प्रसार का स्रोत न बनने देने की अपनी प्रतिबद्धता स्थापित की।

इससे अमेरिका की नजर में भारत को परमाणु क्षेत्र में एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पहचान मिली। इससे पहले भारत परमाणु परीक्षणों की वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आता था।

Dr Manmohan Singh: भारत के लिए परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग आसान होने लगा

इसके साथ ही इस डील का कारवां आगे बढ़ने लगा। 1 अगस्त, 2008 को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भारत के साथ सुरक्षा समझौते को मंजूरी दे दी। इसके चलते जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता साफ हो गया। 6 सितंबर, 2008 को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) ने भारत को सिविल न्यूक्लियर ट्रेड के लिए भी सक्षम बना दिया।

Dr Manmohan Singh: 123 समझौते ने भारत को सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बनने का मौका दिया

10 अक्टूबर, 2008 को 123 समझौते पर तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कोंडेलीजा राइस ने हस्ताक्षर कर दिए। यह समझौता ऐतिहासिक था, जिससे भारत को उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच मिल गई और इसे वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख देश के रूप में स्थापित किया।

Dr Manmohan Singh: ऐसे गिरते-गिरते बची थी मनमोहन सरकार

लेकिन,लेफ्ट को यह समझौता मंजूर नहीं था। मनमोहन सरकार को बाहर से समर्थन दे रह प्रकाश करात के नेतृत्व वाली सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट ने अपना समर्थन वापस ले लिया। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के पास अपना बहुमत नहीं था। इसकी वजह से सरकार अल्पमत में आ गई। हालांकि, तब समाजवादी पार्टी ने अचानक लेफ्ट से कन्नी काटकर मनमोहन सरकार को जीवन दान दे दिया। सरकार गिरते-गिरते बच गई।

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