नॉर्थ कोरिया को छोड़िए, भारत-चीन दुनिया में बढ़ा रहे हैं टेंशन: US मीडिया

नई दिल्ली। डोकलाम पर भारत और चीन के बीच तनातनी अब बढ़ती ही जा रही है। पिछले चार माह से डोकलाम पर दोनों देशों के सैनिकों डेरा डाल रखा है और इस विवाद पर पूरी दुनिया की नजरें जमीं हुई है। यूएस मीडिया सीएनबीसी ने तो यहां तक कह दिया है कि अब नॉर्थ कोरिया से नहीं बल्कि एशिया के इन दो पॉवरफुल देशों ने सभी को डरा दिया है। सीएनबीसी के अनुसार, दुनिया जहां एक तरफ नॉर्थ कोरिया के हरकत पर नजर रख रही है तो दूसरी तरफ विश्व में तेजी के साथ बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले दो ऐसे मुल्कों ने टेंशन बढ़ा दी है, जिनकी सीमाएं एक दूसरे से लगती है।

नॉर्थ कोरिया को छोड़िए, भारत-चीन में बढ़ा रहे हैं टेंशन

एशिया में 'सुप्रीम पावर' बनने की लड़ाई

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इंटरनेशनल रिलेशन इन साउथ एशिया के एक्सपर्ट डॉ. गैरेथ प्राइस बताते हैं कि दोनों ही मुल्क की सेना एक ऐसी धरती पर हथियार ताने खड़ी है, जहां असल में दोनों का कोई लेना देना नहीं है। डॉ. गैरेथ के अनुसार, इस विवाद से साबित होता है कि दोनों ही देश एशिया में अपने आप को सुप्रीम पावर की तरह पेश करना चाहते हैं। चीन इस क्षेत्र में अपना अधिपत्य चाहता है लेकिन इस बार तो भारत ने भी बराबर की चुनौती दी है।

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    नाक की लड़ाई बन गया है 'डोकलाम' विवाद

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    यूएस मीडिया के अनुसार, जून माह से दोनों देशों की सैनिक भूटान के डोकलाम पर आमने सामने एक टक खड़े हैं। चीन जिस धरती पर अपना हक जमा रहा है, भारत इसे मानने को तैयार नहीं है। अब सवाल यह है कि दोनों में से यह जमीन छोड़कर वापस कौन लौटेगा। डोकलाम दोनों देशों के लिए इसलिए नाक का सवाल बन गया है क्योंकि जिस देश की सेना पिछे हटेगी तो उनका एशिया रुतबा कम हो जाएगा।

    भारत अब चीन के बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर से है असहज

    भारत अब चीन के बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर से है असहज

    डॉ. गैरेथ प्राइस के अनुसार, 'इस बार जिस तरह से भारत ने डोकलाम पर जोरदार आपत्ति व्यक्त की है, इससे साबित होता है कि चीन के पूरे महाद्वीप में फैले हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से भारत असहज महसूस कर रहा है'। प्राइस ने यहां तक कहा है कि इस संघर्ष के बावजूद, चीन के विदेश नीति की सबसे बड़ी चिंता है कि क्षेत्र में रोड़ इन्फ्रास्ट्रक्चर को कैसे भी करके सफल बनाना है।

    मोदी ने सुरक्षा को लेकर स्पष्ट कर दिया है

    मोदी ने सुरक्षा को लेकर स्पष्ट कर दिया है

    डोकलाम पर पीछे कौन हटेगा, इसको लेकर पूरी दुनिया में टेंशन है लेकिन इस स्वतंत्रता दिवस के मौक पर लाल किले से पीएम के भाषण से स्पष्ट हो गया है कि इंडियन आर्मी अभी 'मूव बैक' के मूड में बिल्कुल नहीं है। पीएम मोदी इस 15 अगस्त को अपने भाषण में कह चुके हैं कि देश के खिलाफ साजिश रचने वालों से निपटने के लिए भारत पूरी तरह से सक्षम है।

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