क्या लालू प्रसाद यादव इस बार बिहार में बीजेपी को यादव वोंटों में सेंध लगाने से रोक पाएंगे
पटना: बिहार में लोकसभा चुनाव में इस बार मुकाबला महागठबंधन और एनडीए के बीच है। लेकिन इस बार सबकी जुबान पर एक ही सवाल है। क्या आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव का यादव फैक्टर इस बार भी उतना ही मजबूत है, जितना पिछले चुनावों में दिखाई देता है। ये बिहार के सियासी हलकों में से सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है। बिहार की आबादी में 14 फीसदी यादवों का हिस्सा है। उन्होंने 1990 से लालू का समर्थन किया है। वो मुसलमानों के साथ आरजेडी को समर्थन देकर लालू के लिए मजबूत आधार का गठन करते हैं।

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दी चुनौती
2014 के लोकसभा चुनाव लालू यादव के यादव वोटों पर एकाधिकार को पहली बार चुनौती मिली। इस चुनाव में बीजेपी को पहली बार विशेष रुप यादव समुदाय के युवा सदस्यों के बीच समर्थन हासिल हुआ। पहले से संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी मौजूदा लोकसभा चुनाव में यादव वोटों में और बढ़त बना सकती है। बेगुसराय संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले बछवारा स्कूल के प्राइमरी स्कूल टीचर विनोद कुमार यादव कहते हैं कि यहां मुकाबला भाजपा के गिरिराज सिंह और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बीच है। हालांकि विनोद ने जोर देकर कहा कि ये उनकी निजी राय है। लेकिन जाति में ऐसे बहुत से लोग हैं जो उसी तरह सोचते हैं।

19 सीटों पर लड़ रही है आरजेडी
बिहार में आरजेडी इस बार 40 में से 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इसमें से भी उसने सिर्फ 8 यादव उम्मीदवारों को टिकट दिया है। लेकिन यहां महत्वपूर्ण ये है कि मधेपुरा में शरद यादव और पाटलिपुत्र में लालू की बेटी मीसा भारती के खिलाफ एनडीए ने दिनेश चंद्र यादव और राम कृपाल यादव जैसे मजबूत यादव उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। आरजेडी ने उजियारपुर और मधुबनी में गैर-यादव उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जहां पहले ही वोटिंग हो चुकी है। यहां से बीजेपी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और अशोक यादव का सपोर्ट किया। ये दोनों यादव नेता हैं। दोनों नेताओं का दावा है कि उन्हें उजियारपुर और मधुबनी में यादवों ने वोट दिया है। बीजेपी ने कहा कि आरजेडी ने यादवों को एनडीए के खिलाफ वहां मैदान में उतारा है, जहा गैर यादव उम्मीदवार हैं। क्या ये समुदाय लालू के प्रति अपनी वफादारी दिखाता है। बीजेपी के अन्य नेता ने कहा कि और जगहों पर यादव विभाजित हैं।
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पाटलिपुत्र से लालू और मीसा को मिली हार
पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से लालू ने अपनी बेटी मीसा भारती को टिकट दिया है। इस चुनाव में मनेर जो कि पाटलिपुत्र संसदीय सीट में आता है, आरजेडी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। मनेर लालू की अपने समुदाय में पकड़ का संकेत देता है। यहां से केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव मीसा के खिलाफ लड़ रहे हैं जो कि लालू के पूर्व सहयोगी हैं। वो बीजेपी में शामिल हो गए हैं। लालू के राजनीतिक प्रतिद्वंदी रंजन प्रसाद यादव ने कहा कि मनेर में एक लाख से अधिक यादव हैं। मनेर जब आरा संसदीय सीट में थी तब आरजेडी ने यहां से 50,000 से अधिक मतों से बढ़त बना ली थी। अब ये बढ़त घटकर 25,000 रह गई है। ये एक स्पष्ट संकेत है कि लालू से यादवों का मोहभंग हो गया है। पाटलिपुत्र संसदीय सीट 2008 में परिसीमन के बाद बनाई गई थी और इसमें तीन विधानसभा क्षेत्र हैं जो कभी पटना साहिब लोकसभा सीट में थी। बिहार में ये धारणा कि जिन तीन सीटों को पाटलिपुत्र में जोड़ा गया वो बीजेपी के अनुकुल नहीं रही हैं। पाटलिपुत्र लोकसभा के गठन के बाद यहां लगभग 5 लाख यादव मतदाता हैं। फिर भी साल 2009 में लालू रंजन प्रसाद से हार गए, जबकि 2014 में मीसा को राम कृपाल यादव ने पटखनी दी। यादवों के अलावा पाटलिपुत्र में तीन लाख भूमिहार और दो लाख ओबीसी कुर्मी मतदाता हैं। जिनकी लालू और आरजेडी की तरफ झुकाव नहीं है। पाटलिपुत्र में 19 मई को चुनाव हैं।

बीजेपी की नजर यादव वोटों पर
पिछले पांच सालों से बीजेपी की नजर यादव वोटों पर है। बीजेपी ने यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। साल 2013 में बिहार में हुंकार रैली मे तत्कालीन बीजेपी के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जिन्होंने पहली रैली करी थी। उन्होंने इस रैली में घोषणा की थी कि यादव वोटों पर उनका स्वाभाविक अधिकार है क्योंकि वो भगवान कृष्ण के घर द्वारका की भूमि से संबंध रखते हैं। ये धारणा है कि साल 2014 में यादव वोटों का बड़ा हिस्सा, जिसमें विशेष रूप ये युवा थे, वो बीजेपी के पक्ष में आए। हालांकि साल 2015 में ये वापस नीतीश-लालू गठबंधन में लौट आया। इस चुनाव में बीजेपी के पास यादव नेताओं की एक प्रभावशाली सूची है। इसमें नंद किशोर यादव, नित्यानंद राय, राम कृपाल यादव और हुकुमदेव नारायण यादव है। लेकिन उनका प्रभाव अब भी लालू के सामने कम है। एनडीए के नेता, हालांकि यह दावा करते हैं कि 19 लोकसभा क्षेत्रों में यादव वोटों का बंटवारा हुआ है , इसमें कई जगह पहले वोटिंग हो गई है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दावा किया कि 2014 के लोकसभा चुनावों की तुलना में यह काफी अधिक है। वहीं आरजेडी उन दावों को लेकर खारिज करते हुए कहते हैं कि लालू के रांची में न्यायिक हिरासत में होने से उन्हें एक बार फिर यादव वोटों को मजबूत करने में मदद मिली है। एनडीए यादव वोटों के बारे में दिन में सपने देख रहा है।












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