संस्कृत को लेकर विवाद शुरू, तमिल भाषा को आधिकारिक भाषा घोषित करने की अपील

नई दिल्ली। तमिलनाडु में जिस तरह से अन्ना विश्वविद्यालय में भगवत गीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया उसके बाद प्रदेश में संस्कृत भाषा के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। द्रविड मुन्नेत्र कजगम की छात्र ईकाई ने तमिनलाडु में आज संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रम में जबरन थोपने के खिलाफ प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तमिल भाषा की तारीफ थी, ठीक उसके अगले दिन संस्कृत भाषा को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गया है।

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डीएमके की छात्रा ईकाई ने अन्ना यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रदर्शन किया, उनका कहना है कि जबरन हिंदी और संस्कृत भाषा को थोपा जा रहा है। हालांकि अन्ना विश्वविद्यालय में भगवत गीता को वैकल्पिक विषय के रूप में रखा गया है, इसे पढ़ना अनिवार्य नहीं है। पिछले हफ्ते डीएमके ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार प्रदेश में संस्कृत भाषा को थोप रही है, जहां पर लोग द्रविड़ भाषा बोलते हैं, जानबूझकर भगवत गीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

बता दें कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि तमिल काफी समृद्ध और विविधता वाली भाषा है। जब मैं अमेरिका गया और लोगों को संबोधित किया तो मैंने महसूस किया कि तमिल काफी समृद्ध भाषा है। उन्होंने यह बयान आईआईटी मद्रास के 56वें दीक्षांत समारोह के मौके पर दिया। वहीं डीएमके ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि तमिल भाषा को आधिकारिक भाषा बनाया जाए। डीएमके चीफ एमके स्टालिन ने पीएम मोदी के बयान की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का नाम हिंदी में होता है, जबकि इसका ट्रांसलेशन तमिल में होता है। उन्होंने कहा कि तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की आधिकारिक भाषा बनाया जाना चाहिए।

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