Diwali 2022 Cracker Burning के कारण और दमघोंटू बनेगी दिल्ली-NCR की हवा, 5 साल में सबसे अधिक प्रदूषण की आशंका
Diwali 2022 Cracker Burning के लिहाज से अहम साबित होगी। सर्वे के मुताबिक पटाखों से प्रदूषण पिछले पांच साल में Delhi NCR में सबसे अधिक प्रदूषण होने की आशंका है। diwali 2022 cracker burning pollution increase 5 year high
Diwali 2022 के मौके पर Cracker Burning बड़े पैमाने पर होती है। पटाखों के कारण प्रदूषण बड़ी चुनौती है। खासकर बात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों यानी NCR की होती है। दिल्ली एनसीआर में हुए एक सर्वे के मुताबिक दीपावली के मौके पर पटाखों को जलाने के कारण प्रदूषण रिकॉर्ड स्तर तक जा सकता है। बता दें कि अदालतों ने दिल्ली में पटाखों पर बैन लगाया है। हालांकि, नियमों के उल्लंघन और आतिशबाजी के कारण प्रदूषण बढ़ने पर दिल्ली-एनसीआर की हवा और दमघोंटू हो जाती है। ऐसे में इस बार Diwali 2022 Cracker Burning के कारण दिल्ली-NCR में पांच साल में सबसे अधिक पॉल्यूशन होने की आशंका है।

39 फीसद लोग पटाखे जलाएंगे
सर्वे के अनुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर के 39% निवासी Diwali 2022 में भी आतिशबाजी करेंगे। बड़ी संख्या में लोगों के पटाखे जलाने की संभावना के कारण पॉल्यूशन बढ़ेगा। सर्वे के मुताबिक 30% परिवारों ने पहले ही पटाखे स्टॉक कर लिए हैं; 10% पटाखे दिल्ली से और 20% अन्य एनसीआर शहरों से मिले हैं।
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2018 के बाद सबसे अधिक प्रदूषण
दिल्ली-एनसीआर में पांच में से दो परिवारों के पटाखे जलाने की संभावना है। ऐसे में इस दिवाली 2018 के बाद से सबसे अधिक प्रदूषण होने की आशंका है। एक प्रमुख सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल के सर्वेक्षण से संकेत मिला है कि दिल्ली-एनसीआर में दिवाली 2022 में कुल 39 फीसदी परिवार आतिशबाजी करेंगे। 20% लोग ने पटाखे जलाने की योजना भी बना चुके हैं।

महामारी में कम आतिशबाजी हुई
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रहने वाले आतिशबाजी के शौकीन लोग पहले ही एनसीआर से खरीदारी कर चुके हैं। 9% लोगों ने बताया है कि वे पटाखे खरीदेंगे और उन्हें पता है कि पटाखे कैसे हासिल किए जा सकते हैं। 2018 के सर्वेक्षण में 32% परिवारों ने पटाखे जलाने की योजना बनाई थी। 2019 में यह बढ़कर 35 फीसदी हो गया था। हालांकि, 2021 में कोविड-19 महामारी में पटाखे जलाने वाले लोगों की संख्या 7 फीसद गिरकर 32% तक आ गई थी।

क्या पटाखों पर प्रतिबंध प्रभावी नहीं ?
लोकलसर्किल के संस्थापक सचिन टापरिया ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में पांच में से दो परिवारों के पटाखे जलाने या फोड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 10% के पास पटाखे हैं। इन लोगों ने दिल्ली से Firecrackers खरीदे हैं। इससे पता लगता है कि पटाखों पर प्रतिबंध उतना प्रभावी नहीं है जितना होना चाहिए।

पटाखे बैन पर NCR के राज्यों से परामर्श
चूंकि फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम के एनसीआर शहरों में कोई प्रतिबंध नहीं है, इसलिए इन शहरों में हजारों लोग आसानी से पटाखे खरीद लेते हैं। टापरिया ने कहा, "दिल्ली सरकार को पटाखा प्रतिबंध के विषय में एनसीआर के जिला प्रशासन के साथ भी समन्वय करना चाहिए था। इससे प्रतिबंध अधिक प्रभावी होता।"

पटाखे नहीं जलाएंगे ऐसे लोग
हालांकि, सर्वेक्षण का सकारात्मक पहलू ये रहा कि 51% प्रतिभागियों ने पटाखों से परहेज या आतिशबाजी न करने की बात रही। पटाखे न जलाने वाले लोगों ने कहा कि वे पटाखे नहीं जलाएंगे क्योंकि आतिशबाजी प्रदूषण का कारण बनती है। 10% लोगों ने कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध के कारण वे आतिशबाजी नहीं करेंगे। बता दें कि एक वर्ग पालतू पशुओं को होने वाली परेशानी के कारण भी पटाखों के इस्तेमाल से बचने की अपील करता है।

पटाखों की गुपचुप बिक्री, सरकार और अदालत
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने जनवरी 2023 तक सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, सर्वेक्षण के मुताबिक यह चिंता का विषय है कि दिल्ली में गुपचुप तरीके से पटाखों की बिक्री हो रही है। गत 20 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली और अन्य उत्सवों के दौरान पटाखों को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

पटाखों पर बैन, उल्लंघन पर सजा कितनी
बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा लगाए गए सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करने वाली एक याचिका को भी खारिज कर दिया था। पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर 5,000 रुपये का जुर्माना और तीन साल की जेल का प्रावधान है।

प्रदूषण कम करने की कवायद
गौरतलब है कि दीपावली पर आतिशबाजी से पहले ही दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कारण हवा दमघोंटू है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब है। इसे 'poor' श्रेणी में बताया गया है। शनिवार शाम को एयर क्वालिटी इंडेक्स 266 था। दिल्ली सरकार ने आगामी 28 अक्टूबर से 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' अभियान शुरू करने का फैसला किया है। अनुमान है कि ट्रैफिक सिग्नल पर इंजन बंद करने से प्रदूषण में 13-20% की कमी आ सकती है।
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