अखबार बेचकर पूर्व विधायक का बेटा बना जज, संघर्ष को आप भी करेंगे सलाम
नई दिल्ली: यूपी के मेरठ में कांग्रेस के एक पूर्व विधायक के बेटे को अपने सपनों को पूरा करने के लिए अखबार तक बेचना पड़ा। बहनों की देखरेख के लिए तमाम ठोकरें खानी पड़ीं। लेकिन एक दिन वही बेटा अपने परिवार के तमाम सपनों को पूरा करते हुए खुद भी जज बन जाता है। जी हां, वैसे तो शायद ही ऐसा कोई विधायक हो जिसके बेटे को किसी प्रकार की कोई कमी हो लेकिन यहां मामला थोड़ा उल्टा है। मेरठ की अंजता कालोनी निवासी दिव्य प्रताप सिंह निमेष ने ऐसी ही कहानी को सच साबित कर दिखाया है।

पिता विधायक थे लेकिन किस्मत ने ऐसा पलटा मारा कि उसी जगह अखबार तक बेचने को मजबूर मजबूर होना पड़ा जहां से पिता विधायक थे। अपने ही घर से बेदखल होकर किराए के मकान में रहना पड़ा। बहनों की जिम्मेदारी उठाने के लिए बस में परिचालक से लेकर मेडिकल स्टोर में हेल्पर का काम किया। तमाम कठिनाइयों एवं संघर्षों के बावजूद इस शख्स ने कड़ी मेहनत को अपना साथी बनाया। आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करते हुए भी पढाई जारी रखी और आज वो उत्तरप्रदेश में जज बन गए हैं।
दिव्य प्रताप सिंह निमेष के पिता हेमचंद्र निमेष 1980 से 1985 तक सिवालखास से कांग्रेस के टिकट पर विधायक रहे हैं। दिव्य प्रताप जब छह साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया। इसी बीच उनके चाचा की हत्या हो गयी। उनके पिता ने अपनी संतानों को माँ का प्यार जबकि अपने भाई की संतानों को पिता का प्यार देने के लिए परिवार की आपसी रजामंदी के बाद उन्होंने अपने भाई की पत्नी से शादी करके घर बसाया। सब कुछ सही चलने की उम्मीद थी लेकिन पारिवारिक कलह बढ़ गया। मानसिक तनाव के चलते जब वह 12 साल के हुए तो पिता का साया भी सिर से उठ गया।
अब 12 साल के निमेष पर खुद उनकी और दो बहनों की जिम्मेदारी थी। मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से तंग आकर घर से भाग गए। इस परिस्थिति में उन्होंने अपनी बहनों को ताऊजी के यहाँ पर छोड़ा। आजीविका चलाने के लिए कई काम किये जिनमे ट्रक और बस में हेल्पर, मेडिकल शॉप तक में काम करना पड़ा। संघर्ष के इस दौर में उनकी मदद के लिए मामा ने हाथ आगे बढ़ाया। परिवार की चिंताओं के चलते उनकी पढ़ाई छूट चुकी थी लेकिन फिर से उन्होंने पढ़ने का निश्चय किया। पिता के दोस्तों के साथ ही उनके साथियों ने भी मदद की।
अपने पिता के दोस्त करण सिंह से भी उन्हें सहारा मिला और दसवीं एवं बारहवीं की पढ़ाई कर सुभारती कॉलेज ऑफ़ लॉ से एलएलबी पूरी की। इसके बाद CLAT की परीक्षा पास करके उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ कॉलेज से एलएलएम में एडमिशन ले लिया। इसके बाद उन्होंने पांच बार UGC नेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।
धीरे धीरे जिंदगी की गाड़ी चल निकली तो छोटी मोटी नौकरी भी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों बहनों को साथ ले आए और उन्हें भी पढ़ाने लगे और खुद भी तैयारी शुरू कर दी। पिछले चार साल से वह अध्यापन के क्षेत्र में हैं और वर्तमान में आईएएमआर लॉ कॉलेज में कार्यरत हैं।
नौकरी के साथ भी पीसीएस की तैयारी जारी रही। उन्होंने पीसीएस जे की परीक्षा में सफलता हासिल की। उनकी एक बहन भी पीसीएस की तैयारी कर रही है जबकि दूसरी एलएलबी की पढ़ाई कर रही है। अपनी सफलता का श्रेय निमेष अपनी दोनों बहने मोनिका और रितु, पत्नी ज्योति, अपने बेटे दिव्यांश और पिता के दोस्त करण सिंह के साथ ही ताऊ जी सुभाष चंद्र, ताईजी सुशीला देवी, मामा जी आनंद स्वरूप, मामी जी सुनीता देवी और अपने दोस्त सुनीत कुमार द्विवेदी को देते हैं।
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