नॉर्दन आर्मी कमांडर और कारगिल हीरो जनरल ने चीन बॉर्डर को लेकर दिया बड़ा बयान
नई दिल्ली। नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने कहा है कि चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में डिसइंगेजमेंट की शुरुआत हो चुकी है। यहां पर अब अप्रैल 2020 वाली यथा स्थिति को बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। ले. जनरल जोशी ने यह बात इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कही है। आपको बता दें कि 24 जुलाई को भारत और चीन के बीच एक और राउंड की वार्ता हुई है।

यथास्थिति बहाली की कोशिशें जारी
कारगिल विजय दिवस की 21वीं वर्षगांठ पर बोलते हुए ले. जनरल जोशी ने कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सुरक्षा के सभी इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ले. जनरल जोशी कारगिल वॉर में उसी यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) थे जिसका हिस्सा शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा थे। उस समय वह कर्नल की रैंक पर थे। ले. जनरल जोशी इस समय उधमपुर स्थित नॉर्दन कमांडर के पद पर तैनात हैं। ले. जनरल जोशी ने कहा, 'हम वर्तमान समय में पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के साथ मिलिट्री लेवल पर वार्ता कर रहे हैं। कोर कमांडर लेवल की चार दौर की वार्ता के बाद डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कमांडर्स की तरफ से इसका वैरीफिकेशन भी किया जा रहा है।'

डिसइंगेजमेंट एक लंबी प्रक्रिया
उन्होंने आगे कहा कि यह एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है जिसमें बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने हालांकि इस पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया कि क्या चीन के वापसी के लिए कोई समय सीमा तय की गई है और क्या एलएसी पर यथास्थिति की बहाली के लिए कोई डेडलाइन है? उन्होंने कहा कि समय सीमा की जहां तक बात है तो यह एककाल्पनिक सवाल है। उन्होंने इसके बदले बस इतना ही कहा कि एलएसी पर यथास्थिति बहाली के सारे प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच अभी तक पैंगोंग के करीब का इलाका टकराव की बड़ी वजह बना हुआ है। इसी जगह पर पांच मई से दोनों के बीच टकराव शुरू हुआ था। फिलहाल फिंगर 5 पर चीन की सेना पूरी तैयारी के साथ मौजूद है।

अगले हफ्ते एक और कोर कमांडर वार्ता
14 जुलाई को हुई वार्ता में डिसइंगेजमेंट पर जो सहमति बनी थी, चीन अब उसे मानने से पीछे हट रहा है। माना जा रहा है कि अगले माह भारत और चीन की सेना के बीच एक और राउंड कोर कमांडर वार्ता हो सकती है। भारत की सेना की तरफ से कहा गया था डिसइंगेजमेंट एक जटिल प्रक्रिया है। हालांकि उसे चीन की तरफ से किए गए वादों पर कोई भरोसा नहीं है। पीएलए के सैनिक पैंगोंग त्सो और पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 17A से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पीपी 14 (गलवान घाटी) और पीपी 15 (हॉट स्प्रिंग्स) इलाके पर डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं।

चीन मामलों के जानकार ले. जनरल
सेना की 14 कोर पा लद्दाख और इससे सटी एलएसी की सुरक्षा की जिम्मेदारी है और इस फायर एंड फ्यूरी कोर के तौर पर भी जाना जाता है। ले. जनरल जोशी साल 2018 में इसी कोर के कमांडर रह चुके हैं। कारगिल की जंग के बाद ही इस कोर को तैयार किया गया है। ले. जनरल जोशी के पास चीन से जुड़े मसलों से निबटने का अच्छा-खासा अनुभव है। 1999 में कारगिल की जंग के दौरान 'ऑपरेशन विजय' लॉन्च किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान ले. जनरल जोशी जिनका पूरा नाम योगेश कुमार जोशी है, ले. कर्नल थे। उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि द्रास सेक्टर में प्वाइंट 5140 पर कब्जा करना है।

ऑपरेशन विजय के हीरो ले. जनरल जोशी
यह वही चोटी है जो कैप्टन विक्रम बत्रा ने सेना के लिए जीती थी और कैप्टन बत्रा उनकी टीम का ही हिस्सा थे। लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी ने अपनी चतुराई और बहादुरी से दुश्मन को चौंका दिया और सफलतापूर्वक इस लक्ष्य को हासिल कर लिया। प्वाइंट 5140 पर फतह ने भारत की कामयाबी तय कर दी थी। इस दौरान जोशी ने अपने सैनिकों का हौसला बरकरार रखा और आगे बढ़कर नेतृत्व किया। ऑपरेशन विजय में ले. कर्नल की जोशी की टीम ने छह दुश्मनों को मार गिराया। लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने युद्ध के दौरान टाइगर हिल को कब्जा करनेवाली टीम के कमांडिंग ऑफिसर की भूमिका निभाई थी। उस दौरान वह 13वीं जम्मू-कश्मीर राइफल का हिस्सा थे।












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