सीआईसी ने कहा- रिकॉर्ड सहित सार्वजनिक किए जाएं नाथूराम गोडसे के बयान
केन्द्रीय सूचना आयोग के अध्यक्ष श्रीधर ने कहा कि जबकि यह सूचना 20 वर्ष से ज्यादा पुरानी है, ऐसी स्थिति में यदि वह आरटीआई कानून के प्रावधान के तहत नहीं आता तो उसे गोपनीय नहीं रखा जा सकता।

आयोग के सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि कोई व्यक्ति भले ही नाथूराम गोडसे और उनके सह-आरोपी से इत्तेफाक ना रखे, लेकिन उनके विचारों को जारी करने से हम रोक नहीं सकते।
अपने आदेश श्रीधर ने कहा कि, ना ही नाथूराम गोडसे और ना हीं उनके सिद्धांतों और विचारों को मानने वाला व्यक्ति किसी के सिद्धांत से असहमत होने की स्थिति में उसकी हत्या करने की हद तक जा सकता है। बता दें कि दक्षिणपंथी विचारक गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी।
आयोग ने यह आदेश आशुतोष बादल की याचिका पर दिया है। बादल ने दिल्ली पुलिस से इस हत्याकांड का आरोपपत्र और गोडसे के बयान सहित अन्य जानकारी मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने उनके आवेदन को राष्ट्रीय अभिलेखागार के पास भेज दिया लेकिन बादल को वहां से भी जानकारी नहीं मिली। जिसके बाद वो केंद्रीय सूचना आयोग गए।
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