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'नेहरू का हीरो' जो 'वाजपेयी का दोस्त' था, दिलीप कुमार के पॉलिटिकल किस्से... जो खूब हुए मशहूर

मुंबई, 7 जुलाई। हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार सुबह निधन हो गया। अपने जीते जी किंवदंती बन चुके दिलीप साहब को ये नाम उनकी गुरु और मार्गदर्शक देविका रानी ने दिया था। पेशावर में यूसुफ सरवर खान के रूप में पैदा हुए इस दिग्गज अभिनेता ने जब सिनेमाई दुनिया का रुख किया तो देविका रानी ने उनके सामने तीन नाम रखे थे- दिलीप कुमार, जहांगीर और वासुदेव। जाहिर है उन्होंने दिलीप कुमार चुना और बाकी सब कुछ इतिहास की बात है। आज जब दिलीप साहब नहीं है तो उसी इतिहास से कुछ किस्से।

राज्यसभा में दिलीप कुमार की हेयरस्टाइल

राज्यसभा में दिलीप कुमार की हेयरस्टाइल

शायद बहुत कम लोगों को ये कहानी मालूम होगी कि कभी दिलीप कुमार के हेयर स्टाइल की चर्चा संसद में भी उठी थी। आरोप तो ये भी था कि दिलीप कुमार का हेयर स्टाइल युवाओं पर 'बुरा असर' डाल रहा है। दिलीप कुमार की जीवनी 'स्टार लीजेंड ऑफ इंडियन सिनेमा: द डिफिनिटिव बॉयोग्राफी' में कहा गया है कि 50 के दशक में कांग्रेस सांसद लीलावती मुंशी हिंदी फिल्मों में गैरजरूरी और अश्लील दृश्यों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थीं। एक बार उन्होंने राज्यसभा में दिलीप कुमार की हेयर स्टाइल का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह भारतीय युवाओं पर बुरा असर डाल रहा है।

मुंशी के अभियान का असर रहा है कि सरकार ने 1959 में सिनेमा एक्ट में संशोधन करते हुए किसिंग सीन को फिल्मों से बाहर कर दिया लेकिन दिलीप कुमार का हेयर स्टाइल वैसे भी बना रहा।

ये भी संयोग है कि कई दशक के बाद दिलीप कुमार उसी सदन के सदस्य बने जहां पर उनके ऊपर युवाओं पर गलत असर डालने का आरोप लगाया गया था। दिलीप कुमार को लाने वाली भी कांग्रेस ही थी जिसकी सांसद ने दिलीप साहब के बारे में ये बात कही थी।

नेहरू के हीरो थे दिलीप कुमार

नेहरू के हीरो थे दिलीप कुमार

2004 में पूर्व ब्रिटिश सांसद और अर्थशास्त्री लॉर्ड मेघनाद देसाई ने दिलीप कुमार के ऊपर एक किताब लिखी थी। इस किताब का शीर्षक था- 'नेहरूज हीरो: दिलीप कुमार इन द लाइफ ऑफ इंडिया'।

नेहरू को राज कपूर और देव आनंद के साथ दिलीप कुमार पसंद थे। संयोग से इन सभी का जन्म उस इलाके में हुआ था जो आज का पाकिस्तान है और इन सभी ने मुंबई को अपना घर बना लिया था। नेहरू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक विभाग, भारतीय युवा कांग्रेस (तब यह अलग संगठन नहीं था) के एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए 1950 के दशक के दौरान पहली बार दिलीप कुमार को आमंत्रित किया था।

जब दिलीप कुमार ने किया प्रचार

जब दिलीप कुमार ने किया प्रचार

1957 के लोकसभा चुनाव में दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद ने नेहरू की इच्छा का सम्मान करते हुए वीके कृष्ण मेनन के लिए उत्तरी मुंबई सीट पर प्रचार भी किया। इस चुनाव में मेनन की जीत हुई। लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद तीनों ने मेनन से दूरी बना ली। 1967 का चुनाव मेनन हार गए थे।

दिलीप कुमार कभी चुनावी राजनीति में नहीं उतरे लेकिन संवैधानिक ढांचे और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के बारे में मुखर रहे। 1980-81 तक वह तत्कालीन बॉम्बे के शेरिफ बने और दिव्यांगों के कल्याण पर अपना ध्यान केंद्रित किया।

दिलीप कुमार ने कई बार उन राजनेताओं के साथ प्रचार किया जिनसे उनके व्यक्तिगत रिश्ते थे। 1994 में वह पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ एक फंड रेजिंग प्रोग्राम में अमेरिका के डलास भी गए थे। 1999 में दिलीप कुमार ने दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से मनमोहन सिंह के लिए भी प्रचार किया था।

राज्यसभा का आया बुलावा

राज्यसभा का आया बुलावा

दिलीप कुमार 2000 में राज्यसभा के सदस्य बने लेकिन इसके पहले भी कई बार उन्हें उच्च सदन में लाने की कोशिश की जा चुकी थी। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल में भी उन्हें लाने की कोशिश की गई लेकिन अंतिम समय में उनका नाम बदल दिया गया।

आखिर कांग्रेस ने उन्हें 2000 में राज्यसभा के लिए भेजा, जब केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सत्ता में थी। हालांकि दिलीप कुमार नियमित रूप से राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने वालों में नहीं थे लेकिन उन्होंने संसदीय कार्यवाही और विकास कार्यों दोनों में योगदान दिया। दिलीप कुमार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की स्थायी समिति में थे जिसने 2006 में भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम में संशोधन के लिए रिपोर्ट तैयार की।

राजनीतिक विवाद और दिलीप कुमार

राजनीतिक विवाद और दिलीप कुमार

दिलीप कुमार के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब राजनीतिक विवादों की चपेट में भी वह आए। 90 के दशक में शिवसेना ने दिलीप साहब पर पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर निशाना साधा। 1998-99 में पाकिस्तान सरकार ने दिलीप कुमार को पाकिस्तान का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'निशान-ए-इम्तियाज' देने की घोषणा की। शिवसेना ने मांग की दिलीप कुमार को पाकिस्तान से ये पुरस्कार नहीं स्वीकार करना चाहिए।

इस मामले में दिलीप कुमार को उनके साथी और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का साथ मिला और आखिरकार उन्होंने सम्मान स्वीकार किया। अटल जी के कहने पर कारगिल युद्ध के दौरान दिलीप कुमार ने नवाज शरीफ से टेलीफोन पर बात की थी। कहते हैं तब दिलीप कुमार ने कारगिल विवाद के लिए नवाज शरीफ को खरी-खोटी भी सुनाई थी।

भारत सरकार ने दिलीप कुमार को 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सबसे नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

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