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मध्य प्रदेश में क्यों 15 महीने में ही गिरी थी कांग्रेस की सरकार, दिग्विजय सिंह ने बताई पूरी कहानी

Digvijaya Singh on Congress downfall: मध्य प्रदेश की राजनीति में पांच साल पहले हुई सत्ता पलट की कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया है कि 2020 में कमलनाथ सरकार के पतन की असली वजह अंदरूनी टकराव था।

India Today को दिए इंटरव्यू में उन्होंने माना कि कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की उन मांगों को नहीं माना, जिन पर एक डिनर मीटिंग में सहमति बनी थी। दिग्विजय के मुताबिक, ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़ी एक विशलिस्ट तैयार की गई थी, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।

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इसी कारण सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी और सरकार अल्पमत में आ गई। दिग्विजय ने साफ किया कि यह मामला वैचारिक मतभेद का नहीं बल्कि व्यक्तित्व के टकराव का था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी और सिंधिया की लड़ाई की वजह से सरकार गिरी, यह प्रचारित किया गया, लेकिन सच्चाई कुछ और थी।

"धोखा उन्हीं से मिला जिन पर भरोसा था"

इंडिया टुडे ग्रुप से बातचीत में दिग्विजय ने कहा कि हमें जिन पर पूरा भरोसा था, उन्हीं ने धोखा दिया। यह आइडियोलॉजिकल क्लैश नहीं था बल्कि क्लैश ऑफ पर्सनालिटी था। उन्होंने माना कि अगर कमलनाथ ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़ी मांगों को मान लेते, तो शायद सरकार गिरने की नौबत ही नहीं आती।

MP में 2018 में सत्ता में लौटी थी कांग्रेस

मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल बाद सत्ता में वापसी की थी और कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन पार्टी के भीतर नाराजगी लगातार बनी रही। महज 15 महीने बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर दी और बीजेपी में शामिल हो गए।

उनके साथ कई विधायक भी कांग्रेस छोड़कर चले गए, जिससे कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा।

Digvijaya Singh Kamal Nath clash: "मेरे और सिंधिया की लड़ाई की वजह से सरकार नहीं गिरी"

सियासी हलकों में लंबे समय तक यह कहा जाता रहा कि दिग्विजय और सिंधिया की आपसी लड़ाई के कारण कांग्रेस सरकार गिरी। इस पर दिग्विजय ने साफ कहा कि ये प्रचारित किया गया कि मेरी और सिंधिया की लड़ाई से सरकार गिरी, लेकिन सच यह नहीं है। मैंने पहले ही चेताया था कि ऐसा हो सकता है। दुर्भाग्य से मुझ पर हमेशा वही आरोप लगाए जाते हैं, जिनमें मैं दोषी नहीं होता।

दिग्विजय सिंह ने एक इंडस्ट्रियलिस्ट के घर हुई उस डिनर मीटिंग का जिक्र भी किया, जिसमें कमलनाथ और सिंधिया को साथ लाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने बताया-"मैंने उस इंडस्ट्रियलिस्ट से कहा कि देखिए, इन दोनों की लड़ाई से हमारी सरकार गिर जाएगी। फिर उनके घर डिनर रखा गया, मैं भी मौजूद था। बातचीत के दौरान एक लिस्ट बनी कि ग्वालियर-चंबल संभाग में जैसा हम दोनों कहेंगे वैसा होगा। हमने विशलिस्ट तैयार करके हस्ताक्षर भी किए, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।"

दिग्विजय ने साफ कहा कि कमलनाथ ने सिंधिया से किए गए समझौते का पालन नहीं किया। यही वजह थी कि मामला सुलझ नहीं पाया और कांग्रेस सरकार गिर गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि-"मेरा न तो माधवराव सिंधिया से विवाद था और न ही ज्योतिरादित्य सिंधिया से। समस्या समझौते के अमल न होने की थी।"

दिग्विजय के इन बयानों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 2018 में मिली कांग्रेस की जीत और सत्ता की वापसी क्यों महज 15 महीनों में ध्वस्त हो गई। उनका आरोप साफ है-अगर कमलनाथ समय रहते समझौते की शर्तें मान लेते, तो कांग्रेस आज भी मध्य प्रदेश की सत्ता में हो सकती थी।

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