युवक को जीप पर बांधने वाले मेजर गोगोई ने कहा मैंने सिर्फ ड्यूटी पूरी की
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मेजर नितिन लीतुल गोगोई को किया है सम्मानित। मेजर गोगोई ने मीडिया के सामने युवक को जीप पर बांधने वाले मुद्दे पर तोड़ी चुप्पी। कहा मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी पूरी की।
श्रीनगर। कश्मीर में नौ अप्रैल को जब उपचुनावों के लिए वोट डाले जा रहे थे तो उसी दिन बडगाम में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने देश भर में हलचल मचा दी। यहां पर 56 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर नितिन लीतुल गोगोई ने पत्थरबाजों से बचने के लिए कश्मीर के युवक फारुक अहमद डार को जीप पर बांध दिया। अब मेजर गोगोई ने इस पूरे मसले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। मेजर गोगोई को आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने पुरस्कार से सम्मानित किया है।

लोगों की जान बचाने के लिए था फैसला
मेजर गोगोई मंगलवार को मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने यहां पर कहा कि बिना गोली चलाए उन्होंने कई जिंदगियों को बचाया है। मेजर गोगोई ने जो कुछ भी किया कई लोगों ने उसकी काफी आलोचना की थी। वहीं कई लोग उनके समर्थन में खड़े थे। मेजर गोगोई ने पहली बार घटना के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि जो भी कदम उन्होंने उठाया वह उनकी ड्यूटी का हिस्सा था और वह बिल्कुल भी डरते नहीं हैं। मेजर ने कहा, 'जिंदगियों को बचाने के लिए मुझे जो सही लगा मैंने किया। वहां पर मौजूद लोगों की जिंदगी बचाने के लिए मैंने वह कदम उठाया था।'
पत्थरबाजों ने फेंका पेट्रोल बम
मेजर गोगोई ने आगे कहा, 'पत्थरबाजों ने हमारे ऊपर पेट्रोल बम फेंका था लेकिन वह बम फटा नहीं। चारों तरफ से हमारे ऊपर पत्थर बरस रहे थे। मैंने बिना डरे हुए अपनी ड्यूटी को पूरा किया।' मेजर गोगोई की जानकारी के मुताबिक चार लोग और वह पोलिंग बूथ पर सुरक्षा का जायजा लेने गए थे। जब वह उस जगह पर पहुंचे तो भीड़ ने उन पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए थे। लोग छतों से उन पर पत्थर बरसा रहे थे। मेजर गोगोई ने कहा कि वह सिर्फ इतना चाहते थे कि चुनाव शांति से हो जाए। जिस व्यक्ति को उन्होंने जीप से बांधा था वह सिर्फ 30 मीटर की दूरी पर था और उसने भागने की कोशिश की थी।












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