'धीरज साहू गांधी परिवार के लिए थे ATM', केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस पर तंज
ओडिशा में आयकर विभाग के छापे को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीखा तंज कसा है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (16 दिसंबर) को संसद में कहा कि दुनिया जानती है कि धीरज साहू गांधी परिवार के लिए एटीएम हैं।
झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू से जुड़ी कंपनियों में आयकर विभाग की छापेमारी भारी मात्रा में नकदी जब्त की गई है। आईटी के मुताबिक अब तक 350 करोड़ रुपये नकद की बरामदगी हुई। जिसके बाद ओडिशा में राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है।

शनिवार को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा, "दुनिया जानती है कि धीरज साहू गांधी परिवार के लिए एटीएम हैं। धीरज साहू कांग्रेस से तीसरी बार सांसद हैं और हर कोई कहता है कि वह गांधी परिवार के लिए एटीएम थे। एक हफ्ते बाद बचाव में दिए गए उनके बयान को कोई पचा नहीं पा रहा है।"
केंद्रीय मंत्री ने सवाल किया कि ओडिशा में जब्त किया गया पैसा अगर कांग्रेस नेता का नहीं है तो किसका है। प्रधान ने कहा, "धीरज साहू अपनी शर्तों पर आबकारी नीति चला रहे थे और उसमें हेरफेर कर रहे थे। गांधी परिवार के साथ तस्वीरें दिखाकर लोगों पर दबाव बनाना उसका तरीका था। धीरज साहू कांग्रेस परिवार के करीबी विश्वासपात्रों में से एक हैं।"
बता दें कि साहू ने आईटी रेड में मिली नकदी को लेकर मीडिया द्वारा किए गए दावों को गलत बताया। आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि आईटी अधिकारियों द्वारा जब्त की गई नकदी उनके स्वामित्व में जरूर है, लेकिन उनकी नहीं है। सारा पैसा उनके कुछ रिश्तेदारों का है।
मामले में एक सवाल के जवाब में धीरज साहू ने कहा, "मामला उनके और आयकर विभाग के बीच है। मेरे रिश्तेदार इस पर बाद में स्पष्टीकरण देंगे।"
हालांकि मामले में अब आयकर विभाग के बयान का इंतजार है। मामले में जांच जारी है। आईटी विभाग के अधिकारी ही बता पाएंगे कि जब्त नकदी काला धन है या सफेद धन। दावा किया जा रहा है कि अब तक आईटी विभाग ने जो नकदी जब्त की है वो सारी शराब की बिक्री से मिली थी। धीरज साहू के मुताबिक, आयकर विभाग को जो भी कैश मिला है वो 'बलदेव साहू एंड संस' और 'रितेश साहू एंड संस' का है। ये दोनों फर्म धीरज साहू के रिश्तेदारों के स्वामित्व में हैं। साहू ने बताया कि इसके अलावा एक अन्य रिश्तेदार भी कैश इसमें शामिल हैं, जिनके नाम से एक अलग फर्म है।
धीरज साहू ने बौध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड (BDPL) को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस फर्म का स्वामित्व भी उनके रिश्तेदारों के पास ही है, जहां शराब का निर्माण होता है। साहू ने बताया कि आयकर विभाग को बीडीपीएल से कोई नकदी नहीं मिली है।












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