गलती से CAA के विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे देवेंद्र फडणवीस, बाद में डिलीट किया ट्वीट

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन हुए प्रदर्शन में शुक्रवार को हिस्सा लिया। शुक्रवार को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए फडणवीस पहुंचे थे। लेकिन उन्होंने जो ट्वीट किया उसमे फडणवीस ने अगस्त क्रांति मैदान की बजाए आजाद मैदान लिख दिया। दिलचस्प बात यह है कि आजाद मैदान पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था, ऐसे में जब फडणवीस को अपनी गलती का एहसास हुआ तो बाद में फडणवीस ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

किसी भी भारतीय की नागरिकता वापस नहीं ली जाएगी

किसी भी भारतीय की नागरिकता वापस नहीं ली जाएगी

शुक्रवार को मुंबई में दो प्रदर्शन हो रहे थे। एक प्रदर्शन आजाद मैदान पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहा था जबकि दूसरा प्रदर्शन अगस्त क्रांति मैदान पर नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में हो रहा था। देवेंद्र फडणवीस शुक्रवार को नागरिकता कानून के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि इस कानून के द्वारा किसी भी भारतीय की नागरिकता वापस नहीं ली जाएगी। इस दौरान फडणवीस ने अपने पूर्व सहयोगी शिवसेना पर भी तीखा हमला किया। इस पूरे मसले पर जिस तरह से शिवसेना ने चुप्पी साध रखी है उसपर फडणवीस ने शिवेसना पर जमकर निशाना साधा।

शिवसेना पर साधा निशाना

शिवसेना पर साधा निशाना

फडणवीस ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा दूसरे पड़ोसी देश के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। लेकिन कांग्रेस और अन्य कम्युनिस्ट दल एनआरसी और सीएए को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। मैं इस बात से अचंभित हूं कि हमारे पुराने साथी भी इसपर चुप्पी साधे हुए हैं। वह कहते थे कि अवैध बांग्लादेश के नागरिकों को देश से बाहर करना चाहिए, लेकिन अब वह चुप्पी साधे हुए हैं। फडणवीस ने कहा कि हमे इस कानून के समर्थन में प्रदर्शन करने से कोई भी नहीं रोक सकता है। जबतक कि इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है हम इसके समर्थन में प्रदर्शन करेंगे।

 क्या है कानून

क्या है कानून

बता दें कि केंद्र सरकार ने हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून बिल को संसद में पेश किया था, जिसे दोनों ही सदनों में पूर्ण बहुमत के साथ पास कर दिया गया। जिसके बाद यह बिल कानून बन गया। इस एक्ट के अनुसार हिंदू, सिख, मुस्लिम, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के लोग जोकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के निवासी हैं और उनका धर्म के आधार पर शोषण हुआ है, लेकिन वह 31 दिसंबर 2014 से भारत में रह रहे हैं उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी। इस कानून में मुसलमानों के शामिल नहीं किए जाने का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं।

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