फादर स्टेन स्वामी के निधन को UN और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने बताया- विनाशकारी
नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार 84 वर्षीय ट्राइबल राइट्स एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी की अंडर ट्रायल कैदी के रूप में मौत हो जाने के बाद सोशल मीडिया पर हाहाकार मचा हुआ है। लोग संवेदना और पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं। मानवाधिकारों के लिए यूरोपीय संघ के विशेष प्रतिनिधि इमोन गिलमोर और मानवाधिकार रक्षकों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मैरी लॉलर ने फादर स्टेन स्वामी के निधन पर दुख व्यक्त किया है और इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे विनाशकारी बताया है।
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लॉलर ने ट्वीट किया और कहा- भारत से आज की खबर विनाशकारी है। मानवाधिकार रक्षक और जेसुइट पुजारी फादर स्टेन स्वामी की आतंकवाद के झूठे आरोपों में गिरफ्तारी के नौ महीने बाद हिरासत में मौत हो गई है। मानव संसाधन विकास (मानवाधिकार रक्षकों) को जेल भेजना अक्षम्य है।" लॉलर ने अपने ट्वीट के साथ एक यूट्यूब वीडियो का लिंक शेयर किया, जिसमें स्टेन स्वामी दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक कार्यकर्ता के रूप में अपने काम के बारे में बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सोमवार को जब स्टेन स्वामी को वेंटिलेटर पर ट्रांसफर किया गया तो लॉलर ने ट्वीट किया था कि यह बहुत ही चिंता की बात है कि फादर स्टेन स्वामी बहुत गंभीर स्थिति में हैं। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। वो बिना आधार वाले आरोपों में 9 महीने से जेल में हैं। मुझे बेहद दुख है। हालांकि मुझे उम्मीद है कि उन्हें हर संभव उपचार मुहैया कराया जाएगा।
कौन थे फादर स्टेन स्वामी
स्टेन स्वामी का पूरा जीवन सामाजिक गतिविधियों से भरा रहा है। स्टैनिस्लॉस लोर्दूस्वामी उर्फ फादर स्टेन स्वामी एक रोमन कैथोलिक पादरी थे, जिनका जीवन 1990 के दशक से ही झारखंड के आदिवासियों और वंचितों के अधिकारों के लिये काम करने के लिए पूरी तरह समर्पित रहा। 84 वर्षीय स्वामी को भीमा-कोरेगांव मामले में कथित संलिप्तता को लेकर एनआईए (NIA) ने गिरफ्तार किया था।
स्टेन स्वामी का जन्म 26 अप्रैल 1937 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके मित्रों के अनुसार उन्होंने थियोलॉजी और मनीला विश्वविद्यालय से 1970 के दशक में समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने ब्रसेल्स में भी पढ़ाई की, जहां उनकी दोस्ती आर्चबिशप होल्डर कामरा से हुई। ब्राजील के गरीबों के लिए उनके किए गए काम ने स्टेन स्वामी को खूब प्रभावित किया।












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