कोरोना काल की चुनौतियों के बावजूद दिल्ली में नहीं रुकी विकास की रफ्तार, ऐसे आगे बढ़ी राजधानी

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार को मंगलवार को पूरे 6 साल हो गए हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार को मंगलवार को पूरे 6 साल हो गए हैं। साल 2013 में जब वह पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे तो पूर्ण बहुमत न होने की स्थिति में उन्हें मात्र 49 दिनों में इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन 2015 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से रिकॉर्ड 67 सीटें जीतकर विरोधी पार्टियों के दांत खट्टे कर दिए।

Arvind Kejriwal

लोग उनके काम से इतने खुश दिखे की साल 2020 के विधानसभा चुनावों में भी उन्हें भारी मतों से विजय बनाया। 2020 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने 70 में से 62 सीटें जीतीं। केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उन्हें एक साथ दो-दो संकटों का सामना करना पड़ जाएगा। उनके सीएम बनने के तुरंत बाद दिल्ली में दंगे शुरू हो गए और जैसे ही दंगे खत्म हुए तो देश में कोरोना ने दस्तक दे दी जिसने दिल्ली की रफ्तार को एकदम धीमा कर दिया। लेकिन केजरीवाल रुके नहीं उन्होंने हार नहीं मानी और ऐसे काम करके दिखाए जिनपर बात करना आवश्क है

कोरोना को बेहतर ढंग से किया काबू

जब कोरोना ने देश में दस्तक दी तो इसके सबसे अधिक मामले दिल्ली में आ रहे थे। अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड कम पड़ गए थे। ऐसे में केजरीवाल ने प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल शुरू किए जिन्होंने बेहतर परिणाम दिए और आज दिल्ली में कोरोना काफी हद तक कंट्रोल में है।

- उन्होंने दिल्ली में देश का पहला प्लाज्मा बैंक भी खुलवाया, जिससे कोरोना मरीजों को प्लाज्मा प्राप्त करने में आसानी हुई।

- कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रहे ऑटो/टैक्सी ड्राइवरों और दिहाड़ी मजदूरों के खाते में सहायता राशि पहुंचाई।

- दिल्ली में लोगों को सस्ती बिजली मुहैया कराने के लिए केजरीवाल ने 400 यूनिट तक बिजली के दाम 50 प्रतिशत कम कर दिए और 200 यूनिट तक बिजली फ्री कर दी।

- इसके अलावा दिल्ली सरकार हर घर को 20 हजार लीटर पानी हर महीने मुफ्त मुहैया कराती है।

- दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में जो काम करके दिखाया है उसकी दुनियाभर में तारीफ हुई। दिल्ली के शिक्षा मॉडल को आज हर राज्य अपनाना चाहता है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों को उन्होंने सभी सुविधाओं से लैस कर दिया। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का सरकार ने इस तरह आधूनिकीकरण किया कि आज हर मां-बाप अपने बच्चों को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चहते हैं।

केजरीवाल सरकार दिल्ली वासियों की आकांक्षाओं पर कितना खरा उतरी, यह जानने के लिए लोकल सर्जिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हाल ही में एक सर्वे किया था जिसके अनुसार 56 फीसदी लोगों ने केजरीवाल सरकार के काम को बेहतर बताया है।

-प्रदूषण के हालातों को लेकर 35 प्रतिशत लोगों ने माना की बीते एक साल में दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में सुधार हुआ है जबकि 17 फीसदी लोगों ने प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार के काम को खराब बताया जबकि 47 फीसदी ने इसे बहुत खराब बताया।

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