नोटबंदी से 'टेरर फंडिंग' को लगेगा का जोर का झटका, जानिए कैसे
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक सरकार की ओर से निकाले गए 2000 और 500 के नए नोट में कम से कम 7 से 8 अलग से सुरक्षा फीचर हैं।
नई दिल्ली। सरकार के नोटबंदी के फैसले से भले ही आम आदमी को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ रही हो, लेकिन आतंकियों की फंडिंग मोदी सरकार के इस फैसले से बुरी तरह से प्रभावित होने जा रही है।

नोटबंदी से आतंकियों को लगा बड़ा झटका
सरकार के 500 और 1000 रुपये के नोट पर प्रतिबंध का सीधा असर आतंकियों की फंडिंग पर होने की आशंका है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी सूत्रों के मुताबिक नए नोटों को कॉपी करना या नकली नोट बनाना बेहद कठिन हैं। इसकी वजह से इन नोटों के सुरक्षा फीचर।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक सरकार की ओर से निकाले गए 2000 और 500 के नए नोट में कम से कम 7 से 8 अलग से सुरक्षा फीचर हैं, जिसकी वजह से इनकी नकल करना बेहद कठिन है।
अधिकारी के मुताबिक अगर कोई इन नोटों से नकली नोट बनाना भी चाहेगा तो उसे इस काम में कई साल लग जाएंगे।
काफी वक्त से लंबित था नोटों में बदलाव का प्लान
सरकारी अधिकारी के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध की योजना काफी समय से बनाई जा रही थी। हालांकि पूरा अब जा के किया गया।
उनके मुताबिक सामान्य स्थिति में कोई भी देश 7 से 8 साल के बीच अपने नोटों में जरूरी बदलाव करते हैं। साथ ही इसके सुरक्षा फीचर्स में बदलाव के जरिए नकली नोट बनने से रोकते हैं।
बता दें कि अब तक चले आ रहे 1000 के नोट को 2000 में शुरू किया गया था उसके बाद से उसमें कोई बदलाव नहीं किया।
1987 में आया था 500 का नोट
दूसरी ओर अगर 500 के नोट की बात की जाए तो ये 1987 में शुरू किया गया। इसमें एक दशक पहले कुछ बदलाव किए गए।
अधिकारी के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोट में बदलाव की प्रक्रिया काफी समय से हो रही थी आखिरकार सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया, सरकार के इस फैसले की जरूरत ज्यादा थी।
अगर अनुमान लगाया जाए तो करीब 17 लाख करोड़ का कालाधन देश में है। सरकार के इस कदम से सीधे तौर पर करीब चार लाख करोड़ का काला धन बैंकिंग सिस्टम में नहीं आ सकता है।












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