नोटबंदी, जीएसटी और रेरा की वजह से सस्ते हुए घर, देश के हर शहर पर पड़ा असर
नोटबंदी, जीएसटी और रेरा की वजह से घर हुए सस्तें, लेकिन इनकी बिक्री में हुई है कमी, रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष तकरीबन हर शहर में घरों के दाम में हुई कमी।
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नई दिल्ली। वर्ष 2016 में जब केंद्र सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया तो उसके बाद इसकी वजह से कई लोगों के रोजगार चले गए, उद्योग, छोटे व्यापार पर इसका काफी असर पड़ा। लेकिन आखिरकार नोटबंदी से लोगों को एक फायदा हुआ है और इसकी पुष्टि नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट ने की है। रिपोर्ट के अनुसार घर की कीमतों में कमी की बड़ी वजह नोटबंदी, जीएसटी और रियल स्टेट रेग्युलेशन एक्ट है। पिछले वर्ष इन बड़े फैसलों की वजह से घरों की कीमतों में कमी आई है। नाईट फ्रैंक रिपोर्ट के अनुसार घर की कीमतों में हर शहर में तकरीबन 3 फीसदी की कमी आई है, वहीं पुणे में यह कमी 7 फीसदी है, मुंबई में 5 फीसदी है। दिल्ली एनसीआर की बात करें तो यहां घर के दाम छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, इसके साथ ही 2 फीसदी दामों में और कमी हुई है।

मांग में कमी
घरों की कीमतों में कमी की बड़ी वजह है इसकी मांग में कमी, बेंगलुरू, दिल्ली एनसीआर और चेन्नई में घरों की मांग 26 फीसदी, 6 फीसदी और 20 फीसदी कम हुई है। वहीं मुंबई और पुणे में कुछ हद तक मांग में बढ़ोतरी आई है। इसकी वजह रिपोर्ट में यह बताई गई है कि रेरा का महाराष्ट्र में सही से क्रियान्वयन किया गया है, जिसकी वजह से मुंबई और पुणे में बिक्री 3 फीसदी और 5 फीसदी बढ़ी है।

सस्ते घर अधिक बन रहे हैं
बिक्री में कमी की वजह से ही घरों की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरू में नए घरों के प्रोजेक्ट के लॉच में 56 फीसदी और 41 फीसदी की कमी आई है, इसकी वजह से रियल स्टेट सेक्टर को काफी नुकसान हुआ है। एनसीआर में 6 फीसदी बिक्री कम हुई है, जिसकी वजह से 37653 घरों की कीमत में 2 फीसदी कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नए प्रोजेक्ट में सस्ते घरों की सख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, वर्ष 2016 में यह 53 फीसदी थी जबकि 2017 में यह 83 फीसदी पहुंच गई है। इससे साफ है कि डेवलेपर्स 50 लाख के अंदर के घर अधिक बना रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार सस्ते घरों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोन दे रही है।

पिछले साल काफी कम लॉच हुए प्रोजेक्ट
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बजाज का कहना है कि अगर 2010 से रियल स्टेट की तुलना करें तो 2017 के अंत तक यह काफी खराब रही है, रियल स्टेट में काफी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन नोटबंदी के बाद इसमे कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई है। 2010 में कुल 4.80 अपार्टमेंट लॉच किए गए थे, जबकि 2017 में इसकी संख्या सिर्फ 1.03 लाख है। यही नहीं 2010 में घरों की बिक्री की संख्या 3.61 लाख थी, जोकि 2017 में घटकर 2.28 लाख हो गई है।












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