देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' करने की मांग, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
नई दिल्ली: मुगलों के शासनकाल में हमारे देश को हिंदुस्तान कहा जाता था। फिर अंग्रेजों की हुकूमत आई, जिन्होंने इंडिया कहना शुरू कर दिया। इस बीच ज्यादातर देशवासियों ने भारत नाम को पसंद किया। देश की आजादी के बाद इस पर लंबी बहस चली थी। जिसके बाद संविधान में भारत और इंडिया दोनों नाम लिख दिए गए। अब देश का नाम इंडिया की जगह सिर्फ 'भारत' करने की मांग उठी है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। जिस पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे की पीठ मंगलवार को सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक भारत संघ 'इंडिया' नाम को हटाने में असफल रहा है, ये नाम गुलामी का प्रतीक है। ये नाम नहीं हटने से जनता की भावनाओं को ठेस पहुंची है। याचिका में कहा गया कि इंडिया की जगह भारत नामकरण से देश में एक राष्ट्रीय भावना पैदा होगी। इस मामले में 29 मई को सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अनुपस्थित होने के चलते इसकी सुनवाई टाल दी थी। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।
याचिककर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 15 नवंबर, 1948 को हुए संविधान के मसौदे का भी जिक्र किया है, जिसमें संविधान के प्रारूप-1 के अनुच्छेद-1 पर बहस करते हुए एम. अनंतशयनम अय्यंगर और सेठ गोविन्द दास ने 'इंडिया' की जगह भारत, भारतवर्ष और हिंदुस्तान नाम को अपनाने की वकालत की थी। याचिका पर मंगलवार को वकील राज किशोर चौधरी याचिकाकर्ता की ओर से दलील पेश करेंगे।












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