दिल्ली: नहीं खत्म हो रहा 'ऑक्सीजन संकट,'अस्पतालों ने जाहिर किया दर्द, कहा- रोते हुए मरीजों को मना नहीं कर सकते

दिल्ली में नहीं खत्म हो रहा 'ऑक्सीजन संकट', कई अस्पतालों ने जाहिर किया अपना दर्द

नई दिल्ली, 02 मई: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार (01 मई) को दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर कई अस्पतालों ने अलर्ट जारी किया और कहा कि उनके यहां ऑक्सीजन की स्टॉक नहीं है या कम है। दिल्ली के बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति ना होने की वजह से एक डॉक्टर समेत 12 कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल में 80 मिनट पहले एसओएस जारी कर कहा था कि उनके यहां अस्पताल में सिर्फ करीब 80 मिनट तक बिना ऑक्सीजन ही बचा है। अस्पताल ने बताया कि दोपहर 12.45 बजे ऑक्सीजन के टैंकर खत्म हो गए थे और सप्लाई के लिए टैंकर अस्पताल में दोपहर 1.30 बजे पहुंचे थे। जिसकी वजह से 12 मरीजों की मौत हुई।

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CM केजरीवाल बोले- मेडिकल ऑक्सीजन का आवंटित कोटा नहीं मिला था

एक मई को दिल्ली में ज्यादा हुई मौतों के पीछे की एक वजह ऑक्सीजन की कमी भी है। दिल्ली को एक बार फिर मेडिकल ऑक्सीजन का आवंटित कोटा नहीं मिला था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली को शुक्रवार (30 अप्रैल) को 490MT के आवंटित हिस्से में से केवल 312MT ऑक्सीजन ही मिले थे। इसी वजह से ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। सीएम केजरीवाल ने कहा, कोविड-19 रोगियों के लिए बेड की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।

दिल्ली में बीते 24 घंटे में 412 लोगों की कोरोना से मौत

दिल्ली में पिछले 24 घंटों में 412 लोगों की कोरोना से मौत हुई है और 25,219 नए कोविड-19 के मामले मिले हैं। बीते 24 घंटे में 27,421 लोग रिकवर हुए हैं। दिल्ली में फिलहाल 96,747 एक्टिव मरीज हैं।

शनिवार को ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में राज्य सरकार द्वारा संचालित गुरु तेग बहादुर और राजीव गांधी अस्पताल शामिल थे। अधिकारियों ने कहा कि आपातकालिन स्थिति में दोनों अस्पतालों को बड़ी मुश्किल से ऑक्सीजन दी गई।

ऑक्सीजन की कमी पर क्या बोले दिल्ली के डॉक्टर?

बत्रा अस्पताल के कार्यकारी निदेशक डॉ. सुधांशु बनकटा ने कहा, ''सबसे बड़ी अड़चन यह है कि दिल्ली को रोजाना 700MT ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, लेकिन 490MT आवंटित किया गया है, जो कभी नहीं आता। आकलन के बाद पता चला है कि हमारी आवश्यकता (ICU और गैर-ICU बिस्तरों की संख्या के आधार पर) 6.5MT किया है। लेकिन कमी के कारण हमें केवल 4.9MT आवंटित किया गया था। इस बीच, क्योंकि हमारे पास अधिक मरीज हैं, इसलिए हमारी जरूरतें 7MT तक बढ़ गई हैं। हम मदद के लिए रो रहे मरीजों को मना नहीं कर सकते।''

-जीटीबी अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, हमारे सभी स्टाफ और डॉक्टर छोटे सिलेंडर का उपयोग कर रोगियों को ऑक्सीजन देने पर मजबूर थे। ऐसी स्थिति में अस्पताल भी अपने हाथ खड़े कर देता है। हालांकि बस ऑक्सीजन खत्म से कुछ देर पहले ही हमें टैंकर मिले।

-राजीव गांधी अस्पताल के एक डॉक्टर, जो बेड पर 350 गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे हैं, उन्होंन कहा, हमारे पास अस्पताल में केवल आईसीयू बेड हैं। अगर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो हम सभी मरीजों को बचा नहीं पाते। हम हर दिन हैंड-टू-माउथ वाली स्थिति का सामना करते हैं।

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