Delhi Ordinance: राज्यसभा में अटकेगा या पास हो जाएगा बिल? इन आंकड़ों से समझिए
गुरुवार से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में सरकार के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है, दिल्ली पर लाए गए अध्यादेश पर मुहर लगवाना। विपक्षी गठबंधन के लिए यह मुद्दा बहुत ही अहम है, क्योंकि इसी की वजह से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सियासी दुश्मनी दूर हुई है।
केंद्र सरकार के लिए दिल्ली अध्यादेश बिल को लोकसभा से पास करवाने में किसी तरह का कोई संकट नहीं है। क्योंकि, वहां बीजेपी और एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत है। लेकिन, सवाल राज्यसभा को लेकर है, जहां केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है।

राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं
राज्यसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 237 है। इसके हिसाब से सरकार को यह बिल पास कराने के लिए 119 सांसदों का समर्थन चाहिए। लेकिन, बीजेपी के पास अपने सिर्फ 92 सांसद हैं। अगर एनडीए के बाकी सहयोगियों(निर्दलीय समेत) और नामांकित सांसदों को भी जोड़ दें तो भी यह आंकड़ा 111 तक ही पहुंचता है। यानी सरकार के पास 8 सांसदों की कमी है।
विपक्ष भी राज्यसभा में बहुमत से कोसों दूर
अगर संयुक्त विपक्ष या I.N.D.I.A. गठबंधन का बात करें तो उनके पास 98 सांसद हैं। लेकिन, ये तो विधेयक को गिराने के लिए सामान्य बहुमत के जादुई आंकड़ों से बहुत ही कम आंकड़ा है। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी सिर्फ इसी शर्त पर बेंगलुरु में आयोजित I.N.D.I.A. गठबंधन की दूसरी बैठक में शामिल हुई है कि कांग्रेस इस विधेयक का संसद में विरोध करेगी।

गैर-एनडीए और गैर-I.N.D.I.A. दलों पर दारोमदार
अब सारा दारोमदार गैर-एनडीए और गैर-I.N.D.I.A. दलों पर है। ये पार्टियां हैं, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, टीडीपी,जेडीएस और भारत राष्ट्र समिति। इनमें से तेलंगाना में सत्ताधारी के चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस के 7 सांसद हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से उनकी मित्रता को देखते हुए, अगर बीआरएस विधेयक के विरोध में भी वोट डालती है तो विपक्षी सांसदों का आंकड़ा पहुंचता है, 105. लेकिन, यह भी जादुई आंकड़े से बहुत दूर है।
मतलब, एनडीए और I.N.D.I.A. दोनों गठबंधन के लिए उम्मीद की किरण रह जाती हैं, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस। क्योंकि, दोनों दलों के 9-9 राज्यसभा सांसद हैं। ये 18 सांसद जिस तरफ भी जाएंगे, उनका पलड़ा भारी होगा। एनडीए की तरफ इनमें से एक भी गए तो भी सरकार के लिए बिल पास कराना आसान हो जाएगा।
राज्यसभा में भी आंकड़े सरकार के पक्ष में!
लेकिन, इन दोनों दलों ने कई अहम मसलों पर सरकार का जिस तरह से संसद में समर्थन किया है, उससे इस बात की संभावना बहुत ही कम है कि यह सरकार के विरोध में मतदान करेंगे। सरकार का काम सिर्फ इतने भर से आसान हो सकता है कि यह वोटिंग में हिस्सा ही न लें। ऊपर से बीएसपी, जेडीएस और टीडीपी के भी 1-1 सांसद हैं। ये तीनों दल अध्यादेश के विरोध में वोटिंग करेंगे, इसकी संभावना कम है। इस तरह से आंकड़े तो यही बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए राज्यसभा से भी इस बिल को पास कराने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी।
राज्यसभा का गणित-
गठबंधन पार्टी सीट
- एनडीए बीजेपी 92
- एनडीए नामांकित 5
- एनडीए एआईएडीएमके4
- एनडीए आरपीएफ 1
- एनडीए एमपीपी 1
- एनडीए एजीपी 1
- एनडीए एमएनएफ 1
- एनडीए पीएमके 1
- एनडीए एसकेएफ 1
- एनडीए टीएमसी (मूपनार)1
- एनडीए यूपीपीएल 1
- एनडीए एनसीपी (अजित)1
- एनडीए निर्दलीय 1
- विपक्ष निर्दलीय 30
- विपक्ष टीएमसी 13
- विपक्ष एएपी 10
- विपक्ष डीएमके 10
- विपक्ष आरजेडी 6
- विपक्ष सीपीएम 5
- विपक्ष जेडीयू 5
- विपक्ष एनसीपी (शरद)3
- विपक्ष एसपी 3
- विपक्ष एसएस(यूबीटी)3
- विपक्ष सीपीआई 2
- विपक्ष जेएमएम 2
- विपक्ष आरएलडी 1
- विपक्ष मुस्लिम लीग 1
- विपक्ष केसी (एम) 1
- विपक्ष एमडीएमके 1
- विपक्ष निर्दलीय 2
- अन्य बीजेडी 9
- अन्य वाईएसआरसीपी9
- अन्य बीआरएस 7
- अन्य बीएसपी 1
- अन्य जेडीएस 1
- अन्य टीडीपी 1
- कुल 237












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