दिल्ली के LNJP अस्पताल पर आरोप, दो परिवारों को सौंप दिए गलत शव, अंतिम संस्कार के बाद हुआ खुलासा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट में इन दिनों दिल्ली का लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल विवादों के चलते सुर्खियों में है। पहले इलाज के दौरान बरती जा रही बदइंतजामी और अब परिजनों को गलत शव देने के आरोप के बाद अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में है। दो परिवारों ने दावा किया है कि उनके परिजनों को एलएनजेपी अस्पताल में उचित इलाज नहीं दिया गया, साथ ही मरीजों की मौत के बाद उन्हें गलत शव दिए गए। इस आरोप के बाद एक शख्स ने अपनी मां का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया, जबकि दूसरे परिवार ने दो शवों का अंतिम संस्कार किया, जिनमें से एक उनके पिता का था।

परिवार ने लगाया ये आरोप
सीआईएसएफ के सब-इंस्पेक्टर सनी चंद्रा ने न्यूज 18 को बताया कि उनके पिता संत राम का शव 7 जून की सुबह अस्पताल के एंबुलेंस से निंबाबोढ़ घाट पर उन्हें सौंप दिया गया था। सनी चंद्रा ने कुछ घंटे बाद दावा किया कि उन्हें अस्पताल से एक फोन आया जिसमें कहा गया कि उन्होंने एक गलत शव जो कि महिला का था, उसका अंतिम संस्कार कर दिया है। सनी चंद्रा ने कहा, 6 जून को मेरे पिता का निधन LNJP अस्पताल में हुआ। हमें बताया गया कि शव मोर्चरी में दिखाया जाएगा। मृत्यु प्रमाण पत्र वहां दिया गया था जिसमें कहा गया था कि वह पिता की सांस लेने में परेसानी के चलते मौत हुई है।

पिता का शव समझ कर दिया महिला का अंतिम संस्कार
सनी चंद्रा ने आगे बताया कि उन्होंने फिर पिता के शव को ढंग दिया और उनके ऊपर एक पर्चा लगा दिया जिसमें उनका नाम, उम्र, लिंग जैसी जानकारियां थी। फिर सभी एम्बुलेंस में चार से पांच शव डाले गए और निगंबोध घाट पर भेज दिया गया। इसके बाद वहां कागजी कार्रवाई की गई और पंडित ने हमें अंतिम संस्कार के लिए बुलाया। उन्होंने कहा, हमने कई बार पुजारी से निवेदन किया कि अंतिम संस्कार से पहले हमें एक बार चेहरा दिखा दें लेकिन उन्होंने मना कर दिया। चंद्रा ने कहा कि हमारे पास और कोई चारा नहीं था और हमने शव को बिना देखे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। दरअसल, सनी चंद्रा ने जिसका अंतिम संस्कार किया वह मीरा देवी का शव था और उनके पिता का शव एम्बुलेंस में रखा था।

मुकेश को नहीं मिला अपनी मां का शव
निगंबोध घाट पर ही मीरा देवी का बेटा मुकेश अपनी मां के शव को खोजने की कोशिश में एक एम्बुलेंस से दूसरे में भाग रहा था। मुकेश ने कहा, 4 जून को उनकी मां ने सिरदर्द की शिकायत की और उन्हें मालवीय नगर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें LNPP रेफर कर दिया गया। मुकेश ने कहा, मालवीय नगर के डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें शक था कि मेरी मां को कोरोना वायरस है, डॉक्टरों टेस्ट के लिए हमें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भेज रहे थे लेकिन एम्बुलेंस ड्राइवर हमें एलएनजेपी में ले आया। उन्होंने आगे बताया कि मालवीय नगर अस्पताल से मेडिकल कागजात भी एंबुलेंस चालक को ही दिए गए थे, इसलिए हमें पता नहीं था। हमने अपने वाहन में एम्बुलेंस का पीछा किया। एलएनजेपी पहुंचने के बाद, मुझे नहीं पता था कि वे मेरी मां को कहां ले गए। मैंने पूरी रात बार-बार उसका वार्ड नंबर और बेड नंबर मांगा लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे भी हुए कोरोना का शिकार, उनके पांच कर्मचारी भी निकले कोविड19 पॉजिटिव












Click it and Unblock the Notifications