Delhi Liquor Policy पर RTI से मिला जवाब, भाजपा का दावा, खुलासा चौंकाने वाला !
Delhi Liquor Policy एक बार फिर से चर्चा में है। भाजपा का दावा है कि RTI से मिले जवाब में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Delhi Liquor Policy bjp Shehzad Poonawala rti reply 2500 crore exchequer loss
Delhi Liquor Policy पर अरविंद केजरीवाल नीत दिल्ली सरकार कठघरे में है। ताजा घटनाक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सरकारी खजाने को 2500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप लगाया है।

सरकारी खजाने को नुकसान
शहजाद पूनावाला ने राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट (आरटीआई) के तहत दायर आवेदन का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आरटीआई के तहत मिले जवाब से पता चलता है कि दिल्ली सरकार की नई शराब नीति से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

CM केजरीवाल और LG विनय सक्सेना आमने-सामने
दिलचस्प है कि गत दिनों आए मीडिया रिपोर्ट्स में उपराज्यपाल विनय सक्सेना और सीएम केजरीवाल के बीच टकराव समेत आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की नीतियों पर भाजपा नेताओं के सवाल सुर्खियों में रहे।

Delhi Liquor Policy पर सरकार के दावे
गौरतलब है कि दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच कर रही है। सीबीआई ने सिसोदिया समेत दर्जन भर से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। मनीष सिसोदिया का कहना है कि भाजपा आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से डरती है इसलिए मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई जांच महज दिखावा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सिसोदिया और 14 अन्य के आवास और परिसरों पर छापेमारी की थी।
क्या है आबकारी नीति विवाद
दिल्ली सरकार की आबकारी नीति मामले में AAP नेता और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर भारत में कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान जारी की गई नई आबकारी नीति में भ्रष्टाचार का फायदा उठाकर लाभ उठाने का आरोप लगा है। विगत 23 अगस्त को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था, भाजपा और पीएम मोदी के इशारे पर कार्रवाई की जा रही है।
क्या शराब नीति पर दिल्ली सरकार पीछे हटी ?
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति वापस ले ली है। Delhi Liquor Policy वापस लेते समय मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर हमला बोते हुए कहा था कि पुरानी आबकारी नीति के तहत शराब माफियाओं ने 3,500 करोड़ रुपये की चोरी क। बकौल सिसोदिया, शराब माफियाओं ने बड़े नेताओं की जेब में गर्म की। उन्होंने दिल्ली सरकार की बैठक और कैबिनेट नोट में शराब की अधिक बिक्री, व्यवसाय से लाइसेंसधारियों के बाहर निकलने, "अस्वास्थ्यकर बाजार प्रथाओं" के कारण छूट और प्रीमियम ब्रांडों की कमी के बावजूद आबकारी राजस्व के नुकसान जैसे कारणों का हवाला देते हुए विधानसभा में कहा था कि 17 नवबंर 2021 को ही पुरानी आबकारी नीति को वापस ले ली गई थी।












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