केजरीवाल के राज में मनमर्जी फीस नहीं बढ़ा पायेंगे प्राइवेट स्कूल
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी की सरकार बनने से पहले कहा था, कि अगर वो सत्ता में आये तो स्कूलों को अपनी मनमानी नहीं करने देंगे। लीजिये कस दी निजी स्कूलों की लगाम। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सभी निजी स्कूलों के लिये एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सख्त आदेश दिये हैं कि किसी भी प्रकार की फीस में बढ़ोत्तरी करने से पहले स्कूल को सरकार से अनुमति लेनी होगी।

उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने यह सर्कुलर सोमवार को जारी किया। सर्कुलर के तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल अब मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकता है। फीस बढ़ाने से पहले स्कूल को शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर अनुमति लेनी होगी। साथ ही पत्र में बताना होगा कि वो कितनी फीस बढ़ाना चाहते हैं और किस मद में बढ़ाना चाहते हैं। फीस का पूरा विवरण निदेशालय द्वारा पास किये जाने के बाद ही स्कूल फीस बढ़ा सकेंगे।
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स्कूल को फीस इंकीमेंट के प्रोपोज़ल के साथ-साथ 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में कितनी आय हुई इसका ब्योरा भी देना होगा। साथ ही स्टाफ को कितनी सैलरी दी, किस मद में कितना खर्च किया, यह सारा विवरण सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। उसके बाद ही फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर निदेशालय विचार करेगा।
सरकार ने जनता से अपील की है कि जिन स्कूलों में उनके बच्चे पढ़ रहे हैं, यदि वो मनमाने ढंग से फीस बढ़ायें तो तुरंत निदेशालय को सूचित करें। ऐसे स्कूलों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जायेगी। यह सर्कुलर इसी साल से लागू हो गया है। यानी जिन स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है, और अभिभावकों ने फीस जमा कर दी है, उन्हें बढ़ी हुइ फीस वापस देनी होगी और सरकार को प्रस्ताव भेजना होगा।
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प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 31 मई रखी गई है। यदि कोई स्कूल प्रस्ताव नहीं भेजता है, तो यह माना जायेगा कि इस साल स्कूल ने फीस नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया है।
हाल ही में कुछ अभिभावकों ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि कई स्कूलों ने 20 से 50 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। इस वजह से वे काफी परेशान हैं। और तो और स्कूल अपने पसंदीदा पुस्तक विक्रेताओं से ही पुस्तकें और कपड़ा विक्रेताओं से ड्रेस खरीदने का दबाव डलते हैं।












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