कुतुबमीनार परिसर में मंदिरों को फिर से बनाने की याचिका को दिल्ली की अदालत ने किया खारिज
दिल्ली की एक अदालत ने महरौली में कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग करने वाले दीवानी मुकदमे को खारिज कर दिया है।
नई दिल्ली,9 दिसंबर। दिल्ली की एक अदालत ने महरौली में कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग करने वाले दीवानी मुकदमे को खारिज कर दिया है।

मंदिरों को तोड़कर किया गया था मस्जिद का निर्माण
जैन देवता तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव और हिंदू देवता भगवान विष्णु की ओर से अधिवक्ता हरि शंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री और जितेंद्र सिंह विशन द्वारा दायर मुकदमे में दावा किया गया था कि कुतुबदीन ऐबक ने 27 मंदिरों को आंशिक रूप से ध्वस्त कर उनकी सामग्री का दोबारा इस्तेमाल कर परिसर के अंदर कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण कराया था। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान और भविष्य में शांति भंग करने के लिए पिछली गलतियों को आधार नहीं बनाया जा सकता है।
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वर्तमान और भविष्य की शांति को भंग नहीं कर सकते
सिविल जज नेहा शर्मा ने 29 नवंबर को आदेश पारित करते हुए कहा, 'किसी ने भी इस बात से इनकार नहीं किया है कि अतीत में गलतियां की गई थीं, लेकिन इस तरह की गलतियां हमारे वर्तमान और भविष्य की शांति को भंग करने का आधार नहीं हो सकती हैं।' उन्होंने कहा कि हमारे देश का एक समृद्ध इतिहास रहा है और इसने चुनौतीपूर्ण समय देखा है। फिर भी, इतिहास को समग्र रूप से स्वीकार करना होगा। क्या हमारे इतिहास से अच्छे हिस्से को बरकरार रखा जा सकता है और बुरे हिस्से को मिटाया जा सकता है?
अधिवक्ता विष्णु एस जैन के इस वाद में ट्रस्ट अधिनियम 1882 के अनुसार केंद्र सरकार को एक ट्रस्ट बनाने और कुतुब क्षेत्र में स्थित मंदिर परिसर का प्रबंधन और प्रशासन उसे सौंपने के लिए अनिवार्य निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध किया गया था।












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